रोज 3 से 4 घंटे अभ्यास, खान-पान में अनुशासन और परिवार के प्रोत्साहन ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय सफलता। पहली कक्षा की छात्रा ने 22वीं इंटरनेशनल ओकिनावा गोजु आरवाईयू इपोह सिटी ओपन कराटे चैम्पियनशिप-2026 में कुमिटे और कटा दोनों वर्गों में जीता स्वर्ण पदक
परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय
उम्र महज 6 वर्ष, कक्षा पहली की छात्रा और सपने आसमान से भी बड़े। आर्यन वल्र्ड स्कूल में पढऩे वाली नन्हीं आरवी जैन ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर दिया है। मलेशिया में आयोजित 22वीं इंटरनेशनल ओकिनावा गोजु आरवाईयू इपोह सिटी ओपन कराटे चैम्पियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आरवी ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। आरवी ने कुमिटे 20 किलोग्राम वेट केटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके साथ ही 6 से 8 वर्ष आयु वर्ग के कटा मुकाबले में भी स्वर्ण पदक जीतकर दोहरी सफलता हासिल की। इतनी छोटी उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।
कोच खुशबू जैन के मार्गदर्शन में कराटे प्रशिक्षण
मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के सायला गांव से जुड़ी आरवी के पिता मनीष जैन और माता सोनल जैन अपनी बेटी की इस सफलता से बेहद उत्साहित हैं। मलेशिया टूर्नामेंट के दौरान उनकी माता भी उनके साथ मौजूद रहीं और लगातार हौसला बढ़ाती रहीं। वहीं माता-पिता के साथ दादा लक्ष्मीचंद का प्रोत्साहन भी आरवी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आरवी पिछले एक वर्ष से कोच खुशबू जैन के मार्गदर्शन में कराटे प्रशिक्षण ले रही हैं। कम उम्र में ही उन्हें ब्लैक बेल्ट फोर्थ डिग्री डान की पदवी भी प्राप्त है, जो उनकी प्रतिभा और समर्पण को दर्शाती है।
पढ़ाई में भी अव्वल
इस प्रतियोगिता की तैयारी के लिए आरवी रोजाना 3 से 4 घंटे अभ्यास करती थीं। उन्होंने अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया। प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान उन्होंने चॉकलेट और आइसक्रीम से दूरी बनाई तथा प्रोटीन युक्त भोजन, चपाती, फ्रूट जूस और ड्राई फ्रूट्स को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।
कई पदक और प्रमाणपत्र हासिल कर चुकी
आरवी जैन इससे पहले भी कई प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पदक और प्रमाणपत्र हासिल कर चुकी हैं। खास बात यह है कि खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी वह अव्वल हैं। छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली आरवी आज अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं।