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Sarcopenia Alert: क्या आपकी मांसपेशियां उम्र से पहले कमजोर हो रही हैं? इन 5 टेस्ट से लगाएं पता

Muscle Loss Symptoms: क्या आपकी मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं? जानिए सार्कोपेनिया के शुरुआती संकेत और 5 आसान टेस्ट, जिनसे मांसपेशियों की ताकत और स्वास्थ्य का पता लगाया जा सकता है।

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मसल लॉस के बढ़ते खतरे को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर (Photo- Freepik)

Sarcopenia Symptoms: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिनमें से एक है मांसपेशियों (Muscles) का कमजोर होना। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को सार्कोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। आम तौर पर इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन आधुनिक सुस्त लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण अब युवा और कामकाजी लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।

क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट के अनुसार, सार्कोपेनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की मांसपेशियों का मास (Mass), उनकी ताकत और काम करने की क्षमता समय से पहले घटने लगती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह रोजमर्रा के कामों को भी मुश्किल बना देता है।

सार्कोपेनिया होने के मुख्य कारण क्या हैं?

मांसपेशियों के इस नुकसान के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन पबमेड सेंट्रल (PubMed Central - NCBI) में प्रकाशित एक क्लिनिकल रिसर्च के अनुसार, इसके मुख्य कारणों में शारीरिक सक्रियता की कमी (Sedentary Lifestyle), भोजन में प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी, और शरीर में लगातार रहने वाली सूजन (Chronic Inflammation) शामिल हैं। जब शरीर को पर्याप्त श्रम और सही पोषण नहीं मिलता, तो मांसपेशियां धीरे-धीरे सुस्त और कमजोर होने लगती हैं।

इन 5 आसान टेस्ट से लगाएं सार्कोपेनिया का पता

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NIH) के अनुसार, शुरुआती स्टेज में ही कुछ आसान शारीरिक और क्लिनिकल टेस्ट के जरिए यह जाना जा सकता है कि आपकी मांसपेशियां उम्र से पहले कमजोर हो रही हैं या नहीं:

  • हैंडग्रिप स्ट्रेंथ टेस्ट (Handgrip Strength Test)

इस टेस्ट में एक छोटे उपकरण (डायनेमोमीटर) को हाथ से दबाना होता है। यह आपके हाथों और बांहों की मांसपेशियों की ताकत को मापता है। अगर ग्रिप की ताकत मानक स्तर से कम आती है, तो यह सार्कोपेनिया का शुरुआती संकेत हो सकता है।

  • चेयर स्टैंड टेस्ट (Chair Stand Test)

यह मांसपेशियों की क्षमता जांचने का बेहद आसान तरीका है। इसमें बिना हाथों का सहारा लिए, एक कुर्सी से उठना और बैठना होता है। यह टेस्ट मापता है कि आप 30 सेकंड में कितनी बार ऐसा कर पाते हैं, जिससे आपके पैरों और निचले शरीर की ताकत का पता चलता है।

  • वॉकिंग स्पीड टेस्ट (Gait Speed Test)

इस टेस्ट में व्यक्ति को अपनी सामान्य गति से कुछ मीटर की दूरी (जैसे 4 या 6 मीटर) पैदल चलने के लिए कहा जाता है। यदि चलने की गति बहुत धीमी है (जैसे 0.8 मीटर प्रति सेकंड से कम), तो यह मांसपेशियों की कमजोरी को दर्शाता है।

  • डैक्सा स्कैन (DEXA Scan)

यह एक सटीक क्लिनिकल टेस्ट है। डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पशियोमेट्री (DEXA) स्कैन के जरिए डॉक्टरों को आपके शरीर में हड्डियों के घनत्व के साथ-साथ मांसपेशियों के सटीक मास (Muscle Mass) की जानकारी मिलती है।

  • बायोइलेक्ट्रिकल इम्पीडेंस एनालिसिस (BIA)

इस टेस्ट में एक सुरक्षित और हल्की इलेक्ट्रिक करंट के जरिए शरीर के फैट और मसल मास का अनुपात मापा जाता है। यह जिम या क्लिनिक में आसानी से उपलब्ध होता है और मांसपेशियों की सेहत का सटीक ग्राफ देता है।

मांसपेशियों को कमजोर होने से कैसे बचाएं?

सार्कोपेनिया को सही लाइफस्टाइल अपनाकर रोका और ठीक किया जा सकता है:

  • प्रोटीन युक्त आहार: मांसपेशियों के निर्माण के लिए भोजन में पर्याप्त प्रोटीन (जैसे दालें, पनीर, अंडे या लीन मीट) शामिल करें।
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ्ते में कम से कम 2 से 3 दिन रेजिस्टेंस एक्सरसाइज या वजन उठाने वाले व्यायाम जरूर करें।
  • विटामिन-D: मांसपेशियों और हड्डियों के बेहतर तालमेल के लिए विटामिन-D का स्तर सामान्य बनाए रखें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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