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Sanitary Pad Tips: खराब सेनेटरी पैड बन सकता है रैशेज और इन्फेक्शन की वजह, डॉक्टर से जानिए सुरक्षित रहने का सही तरीका

Menstrual Hygiene India: पीरियड्स में रैशेज और इन्फेक्शन से बचना है, तो सेनेटरी पैड की ऊपरी परत (Top-Sheet) पर ध्यान दें। जानिए सर गंगा राम अस्पताल की डॉ. भवानी शेखर की जरूरी सलाह।

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सेनेटरी पैड की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)

SanitaryPad Rashes Treatment in Hindi: मासिक धर्म (Periods) के दौरान सेनेटरी पैड चुनते समय अक्सर महिलाएं केवल इस बात पर ध्यान देती हैं कि पैड की सोखने की क्षमता (Absorbency) कितनी है। बेशक भारी फ्लो को संभालने के लिए यह जरूरी है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हम एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से को नजरअंदाज कर रहे हैं- वह है पैड की ऊपरी परत यानी टॉप-शीट (Top-Sheet)। यह ऊपरी परत सीधे महिलाओं की संवेदनशील त्वचा के संपर्क में आती है, इसलिए इंटीमेट हाइजीन बनाए रखने, रैशेज से बचने और इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में इसकी भूमिका सबसे बड़ी होती है।

खराब क्वालिटी की टॉप-शीट से क्या हैं नुकसान?

स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) डॉ. भवानी शेखर के अनुसार, "कम हवादार (Low Breathability) और खराब क्वालिटी वाली टॉप-शीट महिलाओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई पैड्स में ऊपरी परत को बनाने के लिए प्लास्टिक जैसे मटीरियल, कठोर रसायनों (Harsh Chemicals) या बहुत तेज खुशबू (Excessive Fragrances) का इस्तेमाल किया जाता है। भारत जैसे गर्म और उमस भरे मौसम में, ये सामग्रियां त्वचा के पास नमी को लंबे समय तक लॉक कर देती हैं, जिससे खुजली, गंभीर रैशेज और असहजता होने लगती है।"

चिकित्सीय अध्ययनों से यह भी साबित हुआ है कि पैड के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला मटीरियल सीधे तौर पर योनि के स्वास्थ्य (Vaginal Hygiene) को प्रभावित करता है।

एक्सपर्ट की सलाह: पैड चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?

सीनियर कंसलटेंट (Obstetrics and Gynaecology) डॉ. ऋचा सिंघल का कहना है कि महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़े प्रॉडक्ट्स चुनते समय बहुत सतर्क रहना चाहिए। डॉ. ऋचा बताती हैं, "इंटीमेट एरिया की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील होती है। वहां लंबे समय तक गीलापन रहने या हवा का बहाव ठीक से न होने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। महिलाओं को हमेशा ऐसे सेनेटरी पैड्स का चुनाव करना चाहिए जो पूरी तरह से सॉफ्ट, ब्रीदेबल (हवादार) और डर्मेटोलॉजिकली सुरक्षित हों। इसके साथ ही, चाहे फ्लो कम ही क्यों न हो, पीरियड्स के दौरान नियमित अंतराल (हर 4-6 घंटे) पर पैड बदलना बेहद जरूरी है।"

क्या है मोरिंगा टॉप-शीट और इसके फायदे?

ज्यादातर महिलाएं पीरियड्स के दिनों में नमी और घर्षण (Friction) के कारण होने वाले पैड रैशेज से परेशान रहती हैं। इस समस्या के समाधान के रूप में अब सेनेटरी पैड टेक्नोलॉजी में प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। आजकल पैड की टॉप-शीट में सहजन (Moringa) का उपयोग एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहा है।

मेडिकल रिपोर्ट्स और शोध बताते हैं कि मोरिंगा में प्राकृतिक रूप से एंटी-माइक्रोबियल (Antimicrobial), एंटी-इन्फ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। मोरिंगा के गुणों से युक्त टॉप-शीट संवेदनशील त्वचा को शांत रखने, रैशेज को कम करने, पीरियड्स की गंध (Odour) को नियंत्रित करने और बैक्टीरिया या फंगल इन्फेक्शन के जोखिम को कम करने में सहायक साबित हो सकती है।

इसके अलावा, साल 2024 में द महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह भी सामने आया कि पैड की सतह (Surface Layer) में तकनीकी सुधार और pH-रिस्पॉन्सिव तकनीक गीलेपन को तेजी से कम करके मासिक धर्म की स्वच्छता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

जागरूकता क्यों है जरूरी?

डॉ. रमन कुमार का मानना है कि मेंस्ट्रुअल हेल्थ (मासिक धर्म स्वास्थ्य) को एक सामाजिक वर्जना या हिचकिचाहट का विषय मानने के बजाय एक महत्वपूर्ण पब्लिक हेल्थ इश्यू की तरह देखा जाना चाहिए। विशेष रूप से किशोरियों और युवा महिलाओं में इस बात को लेकर जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है कि घटिया क्वालिटी के सेनेटरी पैड्स का लंबे समय तक इस्तेमाल उनके समग्र स्वास्थ्य (Wellbeing) को प्रभावित कर सकता है। सही प्रॉडक्ट की जानकारी और सही हाइजीन आदतें ही पीरियड्स को सुरक्षित और स्वस्थ बना सकती हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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