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Ramesh Subramanyam Death : हड्डियों के कैंसर के शुरूआती लक्षण जानिए, जिससे हुई तमिल फिल्म डायरेक्टर की मौत

Ramesh Subramanyam Cancer: मशहूर तमिल फिल्म विल् अंबू के डायरेक्टर रमेश सुब्रमण्यम का 49 साल की उम्र में निधन हो गया है। जानें क्या होता है बोन कैंसर, इसके कारण और शुरूआती लक्षण जानिए।

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रमेश सुब्रमण्यम फाइल फोटो- (Source- @X)

Ramesh Subramanyam Cancer Death: तमिल फिल्म विल अंबू (Vil Ambu) फेम डायरेक्टर रमेश सुब्रमण्यम का निधन हो गया है। वह 49 साल के थे और पिछले कुछ समय से कैंसर से लड़ रहे थे। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, रमेश सुब्रमण्यम बोन कैंसर (हड्डियों के कैंसर) से पीड़ित थे।

आइए जानते हैं कि बोन कैंसर क्या होता है? इसके कारण और शुरूआती लक्षण क्या हैं?

क्या होता है बोन कैंसर?

पत्रिका के हैलो डॉक्टर कार्यक्रम में डॉ. अजय यादव ने बताया है कि बोन कैंसर (सार्कोमा) हड्डियों के अंदर होने वाला कैंसर का प्रकार है। इसमें हड्डी के कुछ सेल्स खराब होने लगते हैं और एक गांठ या ट्यूमर बना लेते हैं। यह ट्यूमर धीरे-धीरे हड्डियों को अंदर से कमजोर और खोखला कर देता है, जिससे हड्डियों में तेज दर्द, सूजन और फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है।

सार्कोमा (Sarcoma) कैंसर का वह प्रकार है जो हमारे शरीर के कनेक्टिव टिश्यूज जैसे कि हड्डियों, मांसपेशियों या कार्टिलेज में शुरू होता है।

बोन कैंसर के शुरूआती लक्षण क्या होते हैं?

अमेरीकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, बोन कैंसर के शुरूआती लक्षण निम्न है,

  • हड्डियों में लगातार दर्द होना।
  • गांठ या सूजन दिखाई देना।
  • हड्डियों का अचानक टूट जाना।
  • अचानक वजन कम होना।
  • बहुत ज्यादा थकान होना।

बोन कैंसर के कारण क्या-क्या होते हैं?

मायो क्लिनिक के अनुसार, ज्यादातर हड्डियों के कैंसर के कारण अज्ञात होते है लेकिन फिर भी इसके जोखिम के बढ़ाने वाले कारकों में हड्डियों की दूसरी बीमारियां, परिवार से मिलने वाली बीमारियां या जेनेटिक सिंड्रोम और कैंसर का पुराना इलाज भी भूमिका निभाते हैं। जिन मरीजों में किसी अन्य गंभीर बीमारी या ब्लड कैंसर के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट (स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) हुआ हो, उनमें भी भविष्य में प्राइमरी बोन कैंसर होने की आशंका थोड़ी बढ़ जाती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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