# स्वास्थ्य

Heatstroke Diarrhea: फिजिशियन ने बताया- लू लगने पर दस्त ही नहीं, इन लक्षणों को भी ना करें नजरअंदाज

Heatstroke Causing Diarrhea Hindi: क्या लू लगने पर दस्त या डायरिया भी हो सकता है? फिजिशियन डॉ. संदीप जोशी से जानें हीटस्ट्रोक का पाचन तंत्र पर असर, लू लगने और फूड पॉइजनिंग में कैसे फर्क और शुरुआती लक्षण।

2 min read
पेट दर्द से परेशान बालिका- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Heatstroke Causing Diarrhea: मई के महीने में पारा लगातार आसमान छू रहा है। इस मौसम में चलने वाली लू सिर्फ शरीर में पानी की कमी नहीं करतीं, बल्कि हमारे पाचन तंत्र (डाइजेस्टिव सिस्टम) को भी पूरी तरह बिगाड़ देती हैं। बहुत से लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि लू लगने पर मरीज को तेज दस्त या डायरिया भी हो सकता है। सामान्य तौर पर हम इसे खान-पान की गड़बड़ी मान लेते हैं, लेकिन यह सीधे तौर पर हीटस्ट्रोक का असर हो सकता है।

आइए, फिजिशियन डॉक्टर संदीप जोशी (MD) से समझते हैं कि लू का दस्त लगने से क्या संबंध है।

क्या लू लगने पर दस्त (डायरिया) हो सकते हैं?

हां, लू लगने पर बिल्कुल दस्त हो सकते हैं। जब हमारा शरीर बहुत ज्यादा गर्मी के संपर्क में आता है, तो वह अंदरूनी अंगों को ठंडा रखने के लिए खून के बहाव (ब्लड सर्कुलेशन) को त्वचा की तरफ बढ़ा देता है। इस वजह से हमारे पेट और आंतों की तरफ खून का बहाव अचानक कम हो जाता है।

लू लगने और फूड पॉइजनिंग में कैसे फर्क करें?

गर्मियों में लू लगना और फूड पॉइजनिंग दोनों के लक्षण काफी मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं। लेकिन इन्हें पहचानने का एक आसान तरीका है,

1. लू लगना- इसमें दस्त और उल्टी के साथ-साथ मरीज का शरीर भट्टी की तरह तपने लगता है। उसे चक्कर आते हैं, कमजोरी महसूस होती है और बहुत ज्यादा धूप या गर्म हवा में रहने का इतिहास होता है।

2. फूड पॉइजनिंग- इसमें पेट में तेज दर्द, मरोड़, उल्टी और दस्त की समस्या खराब, बासी या दूषित खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद शुरू हो जाती है। इसमें आमतौर पर लू की तरह शरीर का तापमान बहुत ज्यादा (तेज बुखार) नहीं होता।

लू लगने पर कौन-कौन से शुरुआती लक्षण दिखते हैं?

  • तेज सिरदर्द और चक्कर आना।
  • अत्यधिक थकान और सुस्ती।
  • जी मिचलाना या उल्टी।
  • पेशाब का रंग गाढ़ा होना।
  • त्वचा का लाल और गर्म होना।

लू लगने पर क्या खाना-पीना चाहिए?

  • ओआरएस (ORS) या नमक-चीनी का घोल।
  • लस्सी, छाछ और नींबू पानी।
  • नारियल पानी और बेल का शरबत।
  • हल्का और सुपाच्य खाना।

कब समझें कि डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

  • अगर मरीज का बुखार 103 या 104 डिग्री से ऊपर चला जाए और कम न हो।
  • लगातार उल्टियां हो रही हों।
  • दस्त के साथ पेशाब आना पूरी तरह से बंद हो जाए।
  • मरीज बेहोश होने लगे।
  • आंखें अंदर धंस जाएं और शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ने लगे।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Also Read
View All
Social Jet Lag Side Effects: पूरे हफ्ते की थकान मिटाने के लिए रविवार को देर तक सोना सही है या गलत? न्यूरोलॉजिस्ट से समझें सोशल जेट लैग

Thyroid Myopathy Symptoms: गर्मियों में मांसपेशियों की ऐंठन और जोड़ों के दर्द की वजह हो सकता है थायराइड मायोपैथी, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से जानें सच

बार-बार प्यास लगना सिर्फ गर्मी है या डायबिटीज का संकेत? फिजिशियन ने बताया Polydipsia का कारण

Ramesh Subramanyam Death : हड्डियों के कैंसर के शुरूआती लक्षण जानिए, जिससे हुई तमिल फिल्म डायरेक्टर की मौत

Aplastic Anaemia symptoms: कैंसर सर्वाइवर Tyler Andrews ने 9 घंटे 55 मिनट में फतह किया एवरेस्ट, बचपन में एप्लास्टिक एनीमिया के थे शिकार