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Heart Health: रिपोर्ट नॉर्मल है फिर भी सीने में दर्द? डॉक्टर सुनील कुमार जैन से जानें दिल की सेहत से जुड़ें 5 सवालों के जवाब!

Heart Health: हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार जैन से जानें दिल की धड़कन, सीने में दर्द, कोलेस्ट्रॉल, बीपी और हार्ट टेस्ट से जुड़े आम सवालों के जवाब जो हर किसी के मन में चलते रहते हैं।

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Heart Health (image- gemini)

Heart Health: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हार्ट अटैक समेत अन्य दिल की बीमारियां तो आम हो गई हैं। हमारे दिल की धड़कन तेज होना, सीने में दर्द, घबराहट, सांस फूलना, थकान, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि 40 की उम्र के बाद तो ये समस्याएं सामान्य हो गई हैं। कई बार ये युवाओं में भी दिखने लगी हैं। रिपोर्ट सामान्य आने के बाद भी लक्षण बने रहते हैं।

आइए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार जैन से जानते हैं 5 ऐसे सवालों के जवाब जो बहुत सामान्य हैं और हमारे दिल की सेहत के लिए जानना बहुत जरूरी है।

प्रश्न: मेरी उम्र 55 वर्ष है और मुझे अक्सर सीने में दर्द और जल्दी थकान हो जाती है, क्या यह हृदय रोग का लक्षण हो सकता है?

उत्तर: हां, ये क्लासिकल हृदय रोग के लक्षण हैं। चलने-फिरने या मेहनत करने से छाती के बीचों-बीच दर्द होना, जिसे 'एंजाइना' कहते हैं, या जल्दी थकान होना हार्ट से संबंधित संकेत हैं। इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें।

प्रश्न: मेरी उम्र 48 वर्ष है और मेरे दिल की धड़कन अचानक तेज हो जाती है और घबराहट रहती है, क्या दिल की जांच करवानी चाहिए?

उत्तर: यह 'एरिदमिया' (धड़कन की अनियमितता) हो सकती है। जिस वक्त धड़कन बढ़ी हुई हो, उसी समय ईसीजी (ECG) करवाना सबसे महत्वपूर्ण है ताकि बीमारी पकड़ में आ सके। इसके अलावा आप 2-3 दिन की 'होल्टर मॉनिटरिंग' करवा सकते हैं, जिससे धड़कन के उतार-चढ़ाव का सटीक पता चल सके।

प्रश्न: मेरी उम्र 62 वर्ष है और मुझे सुबह टहलने के बाद सांस फूलने लगती है। इसका उपचार बताएं?

उत्तर: टहलने पर सांस फूलना कार्डियक डिजीज (हृदय रोग) या एलर्जिक अस्थमा, दोनों के कारण हो सकता है। सबसे पहले हृदय रोग की संभावना को रूल आउट करना जरूरी है। आपको विशेषज्ञ से मिलकर आवश्यक जांचें करानी चाहिए ताकि सही कारण का पता चल सके और उपचार शुरू हो सके।

प्रश्न: हाई ब्लड प्रेशर से दिल पर क्या असर पड़ता है?

उत्तर: हाई बीपी हृदय के लिए बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर है। इससे हृदय की दीवारें मोटी हो जाती हैं (हाइपरट्रोफी) और हार्ट को हैवी प्रेशर पर काम करना पड़ता है। लंबे समय तक बीपी बढ़ा रहने से हार्ट वीक हो सकता है, पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction) कम हो सकती है और अंततः हार्ट फेलियर की नौबत आ सकती है।

प्रश्न: क्या दिल के मरीज को रोज दवा लेना जरूरी होता है?

उत्तर: जी हां, दिल के मरीज को लाइफ टाइम (जीवनभर) दवाइयां लेनी पड़ती हैं। हृदय की अधिकांश बीमारियाँ दवाइयों से पूरी तरह 'क्योर' (खत्म) नहीं होतीं, बल्कि उन्हें 'मैनेज' किया जाता है। चाहे वह वाल्व की समस्या हो, ब्लॉकेज हो या हार्ट फेलियर, दवाइयां कभी नहीं छोड़नी चाहिए।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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