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आप भी मैसेज टाइप करते समय बार-बार शब्द भूल जाते हैं? मनोचिकित्सक से जानें कारण

Forgetting words: मैसेज टाइप करते समय बार-बार शब्द भूल जाते हैं? जानें मनोचिकित्सक से इसके कारण, कब हो सकती है चिंता की बात और रिसर्च में क्या हुआ खुलासा।

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मैसेज टाइप करते हुए- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- gemini)

Forgetting words while typing: क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी को मैसेज लिख रहे हों और अचानक कोई आसान सा शब्द ही याद न आए? या फिर एक लाइन लिखने में बार-बार रुकना पड़े? अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर यह आदत बार-बार होने लगे, तो इसे समझना जरूरी है। हाल ही में फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार, लिखने के तरीके, स्पीड और शब्दों के इस्तेमाल में बदलाव कभी-कभी दिमागी क्षमता में आ रहे बदलाव का संकेत हो सकता है।

आइए मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी से पत्रिका की बातचीत के आधार पर समझते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है और कब ये हानिकारक हो सकता है।

क्या है ये नई रिसर्च?

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि क्या इंसान के लिखने के तरीके से दिमाग की कमजोरी (cognitive decline) के शुरुआती संकेत पकड़े जा सकते हैं। इसके लिए बुजुर्ग लोगों के लिखने की स्पीड, रुक-रुक कर लिखना और शब्दों के इस्तेमाल को डिजिटल तरीके से जांचा गया। रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों की सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो रही थी, वे लिखते समय ज्यादा रुक रहे थे और शब्द चुनने में परेशानी महसूस कर रहे थे। हर बार शब्द भूलना बीमारी का संकेत नहीं होता, तनाव और नींद की कमी भी इसकी वजह हो सकती है।

क्या हर बार शब्द भूलना किसी बीमारी का संकेत है?

डॉक्टर के अनुसार, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, नींद की कमी और दिमाग पर ज्यादा बोझ होने से लोग छोटी-छोटी चीजें भूलने लगते हैं। मैसेज टाइप करते समय शब्द याद न आना भी कई बार सामान्य हो सकता है। अगर कभी-कभार ऐसा हो तो घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन अगर रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, बार-बार शब्द भूलें या बातचीत में बहुत परेशानी हो, तब एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है।

किन कारणों से हो सकती है यह दिक्कत?

  • तनाव और ज्यादा चिंता।
  • नींद पूरी न होना।
  • बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।