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Chronic Headache Symptoms: महिलाओं में क्यों बढ़ रही क्रोनिक सिरदर्द की समस्या? न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए

Chronic Headache Causes in Women: बार-बार होने वाला सिरदर्द महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम गुप्ता से जानिए क्रोनिक हेडेक के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके।

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सिरदर्द से परेशान लड़की की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

Chronic Headache in Women: आजकल कई महिलाएं बार-बार होने वाले सिरदर्द को सामान्य बात मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। कभी इसे तनाव समझ लिया जाता है, तो कभी नींद की कमी या कमजोरी। लेकिन कई बार यही दर्द धीरे-धीरे क्रोनिक हेडेक (Chronic Headache) यानी लंबे समय तक रहने वाली गंभीर समस्या बन जाता है।

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम गुप्ता के अनुसार, महिलाओं में माइग्रेन और क्रॉनिक सिरदर्द के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है लगातार तनाव, खराब लाइफस्टाइल और समय पर सही इलाज न मिल पाना।

डॉ. शुभम बताते हैं कि माइग्रेन सिर्फ एक सामान्य सिरदर्द नहीं होता। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द होता है, जिसके साथ उल्टी, चक्कर, रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कई महिलाओं को दर्द शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमक या धुंधलापन भी दिखता है, जिसे ऑरा कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि कई महिलाएं सालों तक यह सोचकर दर्द सहती रहती हैं कि यह सिर्फ तनाव या कमजोरी की वजह से हो रहा है। कुछ लोग बार-बार पेनकिलर लेकर काम चलाते रहते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा दवाएं लेने से सिरदर्द और बढ़ सकता है। इसे रिबाउंड सिरदर्द कहा जाता है।

महिलाओं में ज्यादा क्यों होती है यह समस्या?

डॉक्टर के अनुसार महिलाओं में हार्मोनल बदलाव माइग्रेन की बड़ी वजह माने जाते हैं। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज और हार्मोनल असंतुलन सिरदर्द को ट्रिगर कर सकते हैं। इसके अलावा लगातार मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन देखना, कम नींद लेना, खाना समय पर न खाना और ज्यादा तनाव भी माइग्रेन के खतरे को बढ़ाते हैं।

माइग्रेन से जिंदगी पर पड़ता है असर

क्रॉनिक सिरदर्द सिर्फ दर्द तक सीमित नहीं रहता। इससे काम, परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। कई मरीज अंधेरे कमरे में घंटों बंद रहने को मजबूर हो जाते हैं। बार-बार दर्द होने के डर से उनका आत्मविश्वास भी कम होने लगता है।

क्या है इसका इलाज?

डॉ. शुभम गुप्ता का कहना है कि अब माइग्रेन के इलाज में काफी बदलाव आया है। नई दवाएं और आधुनिक थेरेपी मरीजों को पहले से ज्यादा राहत दे रही हैं। खासतौर पर सीजीआरपी-लक्षित उपचार (CGRP-targeted therapies) जैसी नई तकनीकें माइग्रेन अटैक को कम करने में मदद कर रही हैं। हालांकि सिर्फ दवाओं से काम नहीं चलता। सही नींद, तनाव कम करना, समय पर खाना और अपने ट्रिगर्स को पहचानना भी बहुत जरूरी है। डॉक्टर कहते हैं कि अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज करने की बजाय समय रहते न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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