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Childhood Cancer Symptoms: भारत में हर साल 75 हजार बच्चों को हो रहा कैंसर! डॉक्टर ने बताए शुरुआती संकेत

Childhood Cancer Awareness: भारत में हर साल करीब 75 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। जानिए बच्चों में कैंसर के शुरुआती संकेत क्या हैं, पहचान में देरी क्यों होती है और डॉक्टर क्या सलाह दे रहे हैं।

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बच्चों में बढ़ते कैंसर की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

Cancer Warning Signs in Children: इंडियन चाइल्डहुड कैंसर इनिशिएटिव (आईसीसीआई) द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में हुए अध्ययनों में विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर साल करीब 75 हजार बच्चों में कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। चिंता की बात यह है कि देश में बच्चों में कैंसर की पहचान अक्सर देर से होती है, जिसकी वजह से इलाज शुरू होने में देरी हो जाती है और कई बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में बच्चों में कैंसर से ठीक होने की दर अभी 60 प्रतिशत से भी कम है।

इसी स्थिति को सुधारने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) अब बच्चों में कैंसर की जल्दी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इसके तहत बच्चों के कैंसर का रजिस्टर बनाने और इसे नोटिफायबल डिजीज यानी ऐसी बीमारी घोषित करने पर विचार हो रहा है जिसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी होगा।

कैंसर सर्जन डॉ. अंशुमान कुमार ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि बच्चों में कैंसर का समय पर पता चलना सबसे जरूरी है। अगर बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन भारत में जागरूकता की कमी और लक्षणों को सामान्य बीमारी समझ लेने के कारण कई मामले देर से सामने आते हैं।

बच्चों में कैंसर के कौन-से संकेत दिख सकते हैं?

डॉ. कुमार के अनुसार कुछ लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जैसे-

  • लंबे समय तक बुखार रहना
  • अचानक वजन घटना
  • बार-बार कमजोरी और थकान
  • हड्डियों में दर्द
  • बिना वजह खून आना
  • बार-बार संक्रमण होना
  • आंखों या त्वचा का रंग बदलना

उन्होंने कहा कि अगर बच्चे में ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

भारत में पहचान देर से क्यों होती है?

कई परिवार बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी, संक्रमण या मौसम का असर समझ लेते हैं। गांव और छोटे शहरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी बड़ी वजह है। डॉ. अंशुमान कुमार ने बताया कि सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय डॉक्टरों को भी बच्चों में कैंसर के संकेतों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।

सरकार किन योजनाओं पर काम कर रही है?

आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं बच्चों के कैंसर इलाज में आर्थिक मदद का बड़ा सहारा बन रही हैं। देशभर में टेलीमेडिसिन, हेल्पलाइन और क्षेत्रीय कैंसर सहायता केंद्रों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि इलाज समय पर शुरू हो सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बच्चों में कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए जल्दी पहचान, सही इलाज और आर्थिक सहायता तीनों जरूरी हैं। सही समय पर जांच और इलाज मिलने से हजारों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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