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Schizophrenia Disease: बचपन में बिल्ली पालने वालों में ज्यादा दिखा स्किजोफ्रेनिया का खतरा, 44 साल की रिसर्च में दावा

Cat and Schizophrenia: क्या बचपन में बिल्ली के संपर्क से स्किजोफ्रेनिया का खतरा बढ़ सकता है? जानिए Schizophrenia Bulletin सहित कई रिसर्च में क्या सामने आया और एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं।

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घर में बिल्ली की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)

Cat Ownership Schizophrenia Study: घर में बिल्ली पालना कई लोगों को पसंद होता है। बिल्लियां न सिर्फ अच्छी साथी होती हैं, बल्कि तनाव कम करने में भी मदद कर सकती हैं। लेकिन हाल ही में जर्नल Schizophrenia Bulletin में प्रकाशित एक रिसर्च ने इस विषय पर नई चर्चा छेड़ दी है।

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ रिसर्च के वैज्ञानिकों ने पिछले 44 वर्षों में 11 देशों में हुई 17 स्टडीज का विश्लेषण किया। रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों का बचपन में बिल्लियों से ज्यादा संपर्क रहा, उनमें स्किजोफ्रेनिया (Schizophrenia) और उससे जुड़ी मानसिक समस्याओं का जोखिम अधिक देखा गया। हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिल्ली पालने से सीधे तौर पर स्किजोफ्रेनिया हो जाता है। यह सिर्फ एक संबंध (association) दिखाता है, कारण (cause) नहीं।

क्या है इसकी संभावित वजह?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक इसके पीछे टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी नाम का एक परजीवी (parasite) हो सकता है, जो संक्रमित बिल्ली के मल के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। यह परजीवी अधपके मांस या दूषित पानी से भी फैल सकता है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि यह परजीवी दिमाग और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण व्यवहार, व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अभी तक यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि यही परजीवी स्किजोफ्रेनिया का कारण बनता है।

रिसर्च में क्या मिला?

शोधकर्ताओं के अनुसार, बिल्ली के संपर्क में आने वाले लोगों में स्किजोफ्रेनिया से जुड़ी समस्याओं का जोखिम लगभग दोगुना देखा गया। हालांकि सभी अध्ययनों के नतीजे एक जैसे नहीं थे। कुछ रिसर्च में बचपन में बिल्ली पालने और मानसिक बीमारी के बीच संबंध मिला, जबकि कुछ में ऐसा कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया। एक अध्ययन में तो सिर्फ 9 से 12 साल की उम्र के दौरान बिल्ली के संपर्क को जोखिम से जुड़ा पाया गया, जिससे यह साफ होता है कि अभी इस विषय पर काफी सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।

क्या बिल्ली पालने वालों को चिंता करनी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इस रिसर्च से सिर्फ एक संभावित संबंध सामने आया है। यह साबित नहीं हुआ है कि बिल्ली पालना मानसिक बीमारी का कारण बनता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस विषय पर बड़े और बेहतर गुणवत्ता वाले अध्ययनों की जरूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि बिल्ली, टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी और मानसिक स्वास्थ्य के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।