Cancer Survivor Climbs Everest: अमेरिकी एथलीट टायलर एंड्रयूज (Tyler Andrews) ने 9 घंटे 55 मिनट में एवरेस्ट चढ़कर रचा इतिहास। जानिए बचपन में ब्लड कैंसर (Aplastic Anaemia) से जूझने के बाद शरीर में ऐसा स्टैमिना कैसे मुमकिन है।
Tyler Andrews Everest Record: बचपन में ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराने वाला इंसान जब एवरेस्ट पर सबसे तेज चढ़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाता है, तो मेडिकल साइंस भी हैरान रह जाता है। 36 साल के अमेरिकी एथलीट टायलर एंड्रयूज (Tyler Andrews) ने नेपाल बेस कैंप (5,364 मीटर) से एवरेस्ट की चोटी (8,848.86 मीटर) तक की चढ़ाई महज 9 घंटे 55 मिनट में पूरी कर ली।
वह ऐसा करने वाले दुनिया के पहले नॉन-शेरपा (गैर-नेपाली) बने और 23 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। आइए विशुद्ध रूप से हेल्थ और मेडिकल साइंस के नजरिए से समझते हैं कि कैंसर को मात देने के बाद शरीर में ऐसा सुपरह्यूमन स्टैमिना कैसे मुमकिन है।
जब टायलर 6 साल के थे, तो उन्हें एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia) हुआ था। मेडिकल भाषा में यह एक दुर्लभ प्रकार का बोन मैरो कैंसर है, जिसमें शरीर नए रेड और व्हाइट ब्लड सेल्स बनाना पूरी तरह बंद कर देता है। टायलर को बचपन में कई हैवी कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा था, जिससे मांसपेशियां और आंतरिक अंग बेहद कमजोर हो जाते हैं।
कैंसर रिकवरी के बाद, टायलर ने अपने शरीर की कंडीशनिंग (ट्रेनिंग) इस लेवल पर की कि आज उनके नाम किलिमंजारो और मनास्लु जैसी खतरनाक चोटियों पर सबसे तेज चढ़ने के रिकॉर्ड हैं।
एवरेस्ट पर 8,000 मीटर से ऊपर के हिस्से को डेथ जोन (Death Zone) कहते हैं, जहां हवा में ऑक्सीजन सिर्फ 30% बचती है। वहां आम इंसान का दिमाग हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) के कारण काम करना बंद कर देता है और फेफड़ों में पानी (HAPE) भर सकता है। लेकिन टायलर के शरीर ने इसे कैसे झेला, इसके 3 वैज्ञानिक कारण हैं:
लगातार एंड्यूरेंस ट्रेनिंग (लंबी दौड़ और हाई-अल्टीट्यूड क्लाइंबिंग) से टायलर ने अपने VO2 Max (फेफड़ों द्वारा ऑक्सीजन सोखने की क्षमता) को एक आम इंसान के मुकाबले दोगुना कर लिया। कीमोथेरेपी से डैमेज हुए फेफड़ों को उन्होंने री-कंडीशन करके सुपर-लंग्स में बदल दिया।
टायलर का दिल आम लोगों की तुलना में साइज में थोड़ा बड़ा और मजबूत है। अत्यधिक ऊंचाई पर जहां खून गाढ़ा होने लगता है, इनका दिल एक पंप में सामान्य से तीन गुना ज्यादा ऑक्सीजन युक्त खून को मांसपेशियों (Muscles) तक डिलीवर करता है, जिससे लैक्टिक एसिड (थकान) नहीं बनता।
जिस बोन मैरो ने बचपन में खून बनाना बंद कर दिया था, वह पहाड़ों की कम ऑक्सीजन वाली हवा (Hypoxic Environment) के रिस्पॉन्स में नेचुरल एरिथ्रोपोइटिन (EPO) हार्मोन रिलीज करने लगी। इससे शरीर में तेजी से नए रेड ब्लड सेल्स (RBC) बने, जो ऑक्सीजन को बांधकर रखते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।