Nmcg firstb dolphin ambulance mobile icu: गोंडा में नहर में फंसी डॉल्फिन को 13 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ा गया। इस अभियान में एनएमसीजी की देश की पहली डॉल्फिन एंबुलेंस ने अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सफल रेस्क्यू की सराहना की।
PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हुए एक सफल डॉल्फिन रेस्क्यू अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने इस बचाव अभियान का वीडियो भी साझा किया। गोंडा वन विभाग, टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त कोशिशों से नहर में फंसी एक नर डॉल्फिन को सुरक्षित निकालकर उसके प्राकृतिक आवास राप्ती नदी में छोड़ा गया। इस अभियान में देश की पहली डॉल्फिन एंबुलेंस की भी अहम भूमिका रही।
गोंडा जिले में नहर में फंसी एक डॉल्फिन को सुरक्षित बचाने की कहानी अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस अभियान का जिक्र करते हुए इसकी सराहना की। इसके बाद यह रेस्क्यू ऑपरेशन लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। यह मामला गोंडा वन प्रभाग के रेहराबाजार रेंज के अंतर्गत आने वाले घिरवन डीह क्षेत्र का है। दो मई को वन विभाग को सूचना मिली कि सरयू नहर में एक डॉल्फिन कम पानी के कारण फंस गई है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) के विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे। हालात का जायजा लिया।
डॉल्फिन को सुरक्षित बचाने के लिए अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद अभियान शुरू किया गया। वन विभाग, टीएसए और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर करीब 13 घंटे तक लगातार मेहनत की। आखिरकार डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बचाई गई नर डॉल्फिन का वजन लगभग 26.4 किलोग्राम और लंबाई करीब 5.3 फीट थी। रेस्क्यू के बाद उसे विशेष डॉल्फिन एंबुलेंस में रखा गया। करीब 12 किलोमीटर दूर बलरामपुर जिले के नन्दौरी गांव के पास राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। सुबह के समय डॉल्फिन को उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाया गया।
इस पूरे अभियान में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की विशेष डॉल्फिन एंबुलेंस का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह एंबुलेंस आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस है। मोबाइल आईसीयू की तरह काम करती है। इसमें डॉल्फिन की जांच, उपचार और सुरक्षित परिवहन के लिए आवश्यक सभी उपकरण मौजूद हैं। गोंडा के प्रभागीय वनाधिकारी का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस अभियान की सराहना किए जाने से पूरी टीम का मनोबल बढ़ा है। वहीं टीएसए के विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी 2026 में शुरू हुई। इस विशेष एंबुलेंस सेवा की मदद से अब तक आठ डॉल्फिनों को बचाकर सुरक्षित नदी में छोड़ा जा चुका है।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह अभियान न केवल एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रशासन, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के सहयोग से दुर्लभ जीवों को बचाने में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।