Twisha Sharma: ट्विशा शर्मा हत्याकांड में नया विवाद खड़ा हो गया है। 14 दिन जेल में न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर विशेष सुविधा मिलने की खबर आ रही है। उन्हें आम लोगों की तरह नहीं बल्कि अस्पताल वार्ड में रखा गया है। लोगों का गुस्सा इस मामले पर फूट पड़ा है।
Twisha Sharma murder case jail treatment controversy: ट्विशा शर्माहत्याकांड (Twisha Sharma Murder Case) में एक के बाद एक कई बड़े मोड़ सामने आ रहे हैं। कुछ समय पहले रहस्यमयी और दर्दनाक हालातों में हुई ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस ने ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला और उसके पति समर्थ सिंह को मुख्य आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया था, जिन्हें कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
ट्विशा को न्याय दिलाने की मांग के बीच आरोप है कि 14 दिन की जेल काटने पहुंचे इन दोनों रसूखदार आरोपियों को जेल के अंदर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दिया जा रहा है, जिसने जनता और कानूनी विशेषज्ञों के गुस्से को और भड़का दिया है। आइये जानते हैं आखिर क्यों उठ रहे हैं ये सवाल...
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े अंदरूनी सूत्रों ने बताया है कि गिरफ्तारी के बाद से ही आरोपी जज गिरिबाला और उनका बेटा समर्थ सिंह जेल के सामान्य बैरकों से दूर, जेल के ही अस्पताल वार्ड में आराम से रह रहे हैं। जेल के नियमों के मुताबिक, किसी भी अंडरट्रायल कैदी को केवल बेहद गंभीर या असाधारण बीमारी में ही अस्पताल में रखा जाता है, अन्यथा उन्हें आम कैदियों के साथ नियमित बैरक में रहना पड़ता है। लेकिन गिरफ्तारी के इतने दिन बीत जाने के बाद भी इन दोनों को अस्पताल में ही शरण दी गई है, जिस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि बेटे समर्थ सिंह को किसी मामूली चोट का बहाना बनाकर मेडिकल आधार पर अस्पताल में रहने की छूट दी गई है, जबकि आरोपी महिला न्यायाधीश गिरिबाला को 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देकर अस्पताल के स्पेशल वार्ड में रखा गया है, अब इस मामले की सच्चाई क्या है वो अभी सामने नहीं आई है, लेकिन लोग इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
इस कथित पक्षपात और कानून के दोहरे रवैये को लेकर स्थानीय निवासियों और कानूनी विशेषज्ञों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर ये बात सच है को तो क्या रसूखदार आरोपियों के लिए कानून की किताबें बदल जाती हैं? कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जेल प्रशासन को इस बात का पूरा ब्योरा देना चाहिए कि आखिर किस विशेष मंजूरी के तहत इन दोनों को अस्पताल में रखा गया है।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही इस मामले में रसूख और ऊंचे संपर्कों के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं। मुख्य आरोपियों में एक न्यायिक अधिकारी खुद शामिल हैं, इसलिए इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। लोग अब इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर बहुत करीबी नजर रख रहे हैं। जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग जिस तरह लगातार तेज हो रही है, उसे देखकर लगता है कि वीआईपी कल्चर का यह नया विवाद मामले को बढ़ा कर सकता है।