Illegal sand mining in Chhattisgarh: अवैध रेत खनन के दौरान श्मशान घाट की खुदाई में लगभग 10 मानव कंकाल मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। जानिए पूरा मामला, कानून और सजा की पूरी जानकारी…
Sand mafia in Chhattisgarh: मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती…” यह पंक्तियाँ भारत की समृद्धि और पवित्र भूमि का प्रतीक मानी जाती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से सामने आई एक घटना ने इसी धरती की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सोना-हीरे नहीं, बल्कि करीब 10 मानव कंकाल जमीन से बाहर निकल आए, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह घटना न केवल अवैध रेत खनन की भयावह तस्वीर दिखाती है, बल्कि इंसानियत और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों की संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
पूरा मामला छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खरेंगा गांव का है, जो महानदी के किनारे स्थित है। यहां अवैध रेत उत्खनन के लिए रेत माफियाओं ने श्मशान घाट तक को नहीं छोड़ा। आरोप है कि यहां 6 से 7 फीट तक गहरी खुदाई की गई, जिससे वर्षों पहले दफन किए गए शवों के अवशेष बाहर आ गए। गुरुवार को जब ग्रामीण मनरेगा कार्य के दौरान मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि रेत के बीच मानव हड्डियाँ और कफन के अवशेष बिखरे पड़े हैं। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद यह किसी जानवर के अवशेष होंगे, लेकिन पास जाकर देखने पर सच्चाई सामने आई और वहां लगभग 10 मानव कंकाल मौजूद थे।
इस घटना की खबर जैसे ही पूरे गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण श्मशान घाट पहुंच गए। वहां का दृश्य बेहद भयावह और भावनात्मक था। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जिन परिजनों को सम्मान के साथ दफनाया गया था, उनकी कब्रें भी रेत माफियाओं ने खोद डालीं। ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आने लगी।
गांव की बुजुर्ग महिला देवला बाई साहू इस घटना को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “जिस दुख को हम सालों पहले भुलाने की कोशिश कर चुके थे, वह फिर से सामने आ गया है। जिन अपनों को सम्मान के साथ दफनाया था, उनके अवशेष रेत में बिखरे पड़े थे।” उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अब मृत्यु के बाद भी कब्रों की सुरक्षा को लेकर डर बना रहेगा। वहीं ग्राम सरपंच नीलम साहू ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में भी ट्रैक्टरों के जरिए अवैध खनन लगातार जारी रहता है।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया। धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि मौके से 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। साथ ही संबंधित क्षेत्र के माइनिंग इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने यह भी कहा कि जिस स्थान पर रेत भंडारण की अनुमति दी गई थी, उसे रद्द कर दिया गया है। एनजीटी के निर्देशों के अनुसार 15 जून तक सभी रेत खदानों को बंद करना अनिवार्य है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में खनन की अनुमति है, वहां दोबारा सीमांकन कराया जाएगा और अवैध रेत खनन व परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह कोई पहला मामला नहीं है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अवैध रेत खनन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ समय पहले कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में भी अवैध रेत खनन का मामला सामने आया था, जहां मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही थी। स्थानीय विधायक तक को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा था।
सरकारी नियमों के अनुसार अवैध खनन पर अब बेहद सख्त कार्रवाई की जाती है। धमतरी के खरेंगा गांव की यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि व्यवस्था, लालच और इंसानियत के बीच टकराव की दर्दनाक तस्वीर है। जहां एक ओर कानून सख्त हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध रेत खनन का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। श्मशान घाट से मिले मानव कंकाल इस बात का सबूत हैं कि जब लालच हावी हो जाता है, तो न जमीन बचती है और न ही मर्यादा।
छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है।
अवैध रेत खनन, परिवहन या भंडारण की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित राजस्व, खनिज या पुलिस विभाग को सूचना दें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदेश में खनन गतिविधियों की प्रभावी निगरानी, नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करने तथा अवैध कारोबारियों पर त्वरित कार्रवाई करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘खनन सूचना केंद्र’ की स्थापना की गई। इसके साथ ही आम जनता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 भी जारी किया गया है।