Robert Kiyosaki on Gold: रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर बड़े मार्केट क्रैश की चेतावनी दी है। उनका दावा है कि भविष्य में सोना 1 लाख डॉलर और चांदी 200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
Gold Price: मशहूर किताब Rich Dad Poor Dad के लेखक Robert Kiyosaki ने एक बार फिर ऐसा बयान दे दिया है, जिसने निवेशकों के बीच नई बहस छेड़ दी है। कियोसाकी का कहना है कि बाजार में बड़ा क्रैश कभी भी आ सकता है। लेकिन उनके मुताबिक, ऐसे दौर में सोना और चांदी निवेशकों को मालामाल कर सकते हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'दिग्गज मार्केट रणनीतिकार Jim Rickards का मानना है कि भविष्य में सोना 1 लाख डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।' जबकि सोने की कीमत इस समय करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस है। यानी कीमत में सीधे-सीधे 22 गुना इजाफा। यह अनुमान किसी को भी चौंका सकता है। वहीं, कियोसाकी खुद मानते हैं कि चांदी 200 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। चांदी का वैश्विक भाव इस समय 75 डॉलर प्रति औंस के करीब है।
दरअसल, इस समय दुनिया कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका समेत कई देशों में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। तेल की कीमतों में उछाल भी महंगाई को बढ़ाने का खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं और यही वजह है कि सोना-चांदी जैसी धातुओं की चर्चा फिर तेज हो गई है।
कियोसाकी लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि सिर्फ कागजी करेंसी या पारंपरिक निवेश पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। वह लगातार सोना, चांदी और Bitcoin जैसे एसेट्स में निवेश की वकालत करते रहे हैं।
कियोसाकी का मानना है कि बड़े आर्थिक संकट सिर्फ नुकसान नहीं लाते, बल्कि सही तैयारी वाले लोगों के लिए कमाई के मौके भी पैदा करते हैं। उनके मुताबिक, समझदार निवेशक वही होता है जो आने वाले जोखिम को पहले पहचान ले और समय रहते अपनी पोजिशन मजबूत कर ले। उन्होंने कहा कि बाजार गिरने पर हर कोई पीड़ित नहीं बनता, कुछ लोग उसी दौर में ज्यादा अमीर भी बनते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाए हैं। इसका मकसद अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना माना जा रहा है। यही वजह है कि गोल्ड को लेकर तेजी की धारणा मजबूत बनी हुई है। वहीं, चांदी सिर्फ कीमती धातु नहीं है। इसका इस्तेमाल सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए निवेशकों की दिलचस्पी इसमें भी बढ़ रही है।
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणियां काफी एग्रेसिव हैं। सोना अगर सच में 1 लाख डॉलर प्रति औंस तक पहुंचता है, तो इसका मतलब होगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा संकट या वित्तीय सिस्टम में भारी उथल-पुथल आई है। लेकिन इतना जरूर है कि दुनिया में बढ़ते कर्ज, महंगाई और कमजोर होती करेंसी को लेकर चिंता अब पहले से ज्यादा गंभीर हो चुकी है। यही वजह है कि गोल्ड और सिल्वर के समर्थकों की आवाज फिर तेज होने लगी है।