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Gold Demand: देश ने सुन ली नरेंद्र मोदी की अपील? 15 दिन में 70% गिर गई सोने की मांग, ज्वैलर्स परेशान

Gold Market News: पीएम मोदी की अपील, सोने पर आयात शुल्क बढ़ने, अधिक मास और बढ़ती महंगाई ने ग्राहकों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर सोने की खरीदारी पर भी दिख रहा है। देश में सोने की मांग करीब 70% तक घट गई है।

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Gold Demand: सोने की मांग में भारी गिरावट आई है। (PC: AI)

Gold Price: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को भारत की जनता से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। यूएस-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की उच्च कीमतों के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के मकसद से पीएम ने यह अपील की थी। इसके साथ ही सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया। पीएम की अपील और इंपोर्ट ड्यूटी में हुए इस इजाफे का असर अब दिखने लगा है। लोग सोने की खरीदारी से पीछे हट रहे हैं। पीएम की अपील के बाद से सोने की डिमांड में करीब 70 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई है।

घटकर 7.5 टन रह गई गोल्ड डिमांड

पीएम की अपील और इंपोर्ट ड्यूटी दोगुने से भी ज्यादा होने के बाद बाजार में सोने की खरीदारी अचानक काफी धीमी पड़ गई। इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि 27 मई को खत्म हुए पखवाड़े में सोने की मांग घटकर करीब 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 25 टन थी।

लोग नहीं खरीद रहे सोना

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि देशभर के ज्वैलर्स से मिल रही जानकारी साफ बता रही है कि पीएम की अपील और ड्यूटी बढ़ने के बाद मांग में भारी गिरावट आई है। उनका कहना है कि सोने के कारोबार का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से आता है और इस वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि बढ़ी हुई ईंधन कीमतों और खाद्य महंगाई ने भी लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। ऐसे में सोना फिलहाल अधिकांश परिवारों की प्राथमिकता सूची से बाहर हो गया है।

जोयालुक्कास के स्टोर्स में 35% घटी डिमांड

ज्वैलरी रिटेल चेन जोयालुक्कास के चेयरमैन जॉय अलुक्कास के मुताबिक, ग्राहकों का रुझान कई कारणों से कमजोर हुआ है। कंपनी के स्टोर्स में मांग 35 फीसदी से ज्यादा घटी है और आने वाले समय को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

टैक्स ने तोड़ी खरीदारों की कमर

ड्यूटी बढ़ने के बाद जीएसटी समेत सोने पर कुल टैक्स बोझ लगभग दोगुना होकर 18.45 फीसदी तक पहुंच गया है, जो पहले 9.18 फीसदी था। सरकार ने कमजोर रुपये, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक तनावों के बीच यह कदम उठाया था। साथ ही आयात नियमों को भी सख्त किया गया है।

अधिक मास का भी है असर

बाजार पर एक और असर अधिक मास का भी पड़ रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में लोग आमतौर पर सोना और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने से बचते हैं। ज्वैलर्स का कहना है कि हैरानी की बात यह है कि निवेश के लिए होने वाली खरीदारी भी कमजोर पड़ गई है।

दक्षिण भारत में भी घटी डिमांड

दक्षिण भारत, जो देश के सबसे बड़े गोल्ड मार्केट्स में गिना जाता है, वहां भी मांग कमजोर बनी हुई है। ग्राहक अब हल्के वजन और कम कैरेट वाले गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि बजट पर ज्यादा दबाव न पड़े। दिलचस्प बात यह है कि जहां गहनों की खरीदारी सुस्त हुई है, वहीं पुराने सोने की बिक्री बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ग्राहक अब उतना ही सोना खरीद रहे हैं जितना उनकी जेब इजाजत दे रही है। दूसरी तरफ पुराने गहने बेचकर नकदी लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

छोटे ज्वैलर्स की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण

सभी कारोबारियों पर असर एक जैसा नहीं है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिसर्च हेड कविता चाको का कहना है कि बड़ी ज्वेलरी चेन्स के पास पर्याप्त स्टॉक है और शादी-ब्याह की मांग से उन्हें कुछ सहारा मिल रहा है। लेकिन छोटे ज्वैलर्स की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन पर बिक्री घटने और मुनाफा कम होने का दोहरा दबाव है।

हर साल होती है 800 टन गोल्ड की खपत

भारत में हर साल करीब 800 से 850 टन सोने की खपत होती है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मुंबई के स्पॉट मार्केट में 24 कैरेट वाला सोना करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। गोल्ड इंडस्ट्री को आशंका है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे तो 2026 की दूसरी तिमाही में निवेश संबंधी मांग भी दबाव में रह सकती है।