MP Monsoon Update 2026: मध्यप्रदेश में मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। पूर्वी संभागों में गरज-चमक के साथ बारिश और धूलभरी आंधी की संभावना बन रही है। पश्चिमी एमपी में अभी भीषण गर्मी जारी है। जानें पूरा मौसम अपडेट।
MP Monsoon Update 2026: देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मौसम विश्लेषण के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही देश में सक्रिय विभिन्न मौसम प्रणालियां अब मध्यप्रदेश के मौसम को भी प्रभावित करने लगी हैं।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में दक्षिण अरब सागर से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुकी है तथा अगले 3 से 4 दिनों में इसके और आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। IMD ने पहले ही संकेत दिए थे कि इस वर्ष मानसून केरल में सामान्य तिथि से पहले पहुंच सकता है।
वर्तमान मौसम प्रणालियों का सबसे बड़ा प्रभाव मध्यप्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियों के रूप में दिखाई देगा। दक्षिण बिहार से उत्तर तटीय आंध्रप्रदेश तक बनी उत्तर-दक्षिण ट्रफ रेखा झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर गुजर रही है। इसके कारण पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश में नमी बढ़ने लगी है।
जम्मू-कश्मीर के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय बना हुआ है। इसके अतिरिक्त 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है।
दक्षिण-पूर्व एवं मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर रहा है। यही कारण है कि पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर धीरे-धीरे मध्यप्रदेश तक भी पहुंचेगा।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून पूर्व चरण में अक्सर दिन का तापमान थोड़ा कम होता है, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से उमस बढ़ जाती है। मध्यप्रदेश में भी आने वाले दिनों में ऐसी ही स्थिति बन सकती है। विशेष रूप से भोपाल, जबलपुर और इंदौर जैसे शहरों में गर्मी के साथ उमस भी परेशान कर सकती है।
IMD के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है और देशभर में औसत वर्षा लगभग 92% रहने का अनुमान है। हालांकि शुरुआती मानसूनी गतिविधियाँ फिलहाल मजबूत दिखाई दे रही हैं।
देशभर में मानसून पूर्व गतिविधियाँ तेज हो चुकी हैं और अब मध्यप्रदेश में भी मौसम का मिजाज धीरे-धीरे बदलने लगेगा। पूर्वी जिलों में आंधी-बारिश और बादलों की गतिविधियाँ बढ़ेंगी, जबकि पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप फिलहाल जारी रहेगा। मई के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में कुछ राहत मिलने की संभावना बन रही है।
मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रही, बल्कि रातें भी लगातार गर्म होती जा रही हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी मौसम प्रेक्षणों के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। इससे लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।
प्रदेश के ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़ और जबलपुर जैसे शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 30.7°C तथा दतिया में 30.6°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 3 डिग्री अधिक है। इसी प्रकार टीकमगढ़ में न्यूनतम तापमान 30.0°C रिकॉर्ड हुआ।
राजधानी भोपाल में भी गर्मी का असर रातभर बना रहा। यहां न्यूनतम तापमान 29.0°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7°C अधिक है। वहीं जबलपुर और छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 29.6°C रिकॉर्ड हुआ। छिंदवाड़ा में यह सामान्य से 5.5°C अधिक रहा, जो प्रदेश में सबसे अधिक सकारात्मक विचलन है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जब रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहता है तो इसे “गर्म रात्रि” जैसी स्थिति माना जाता है। ऐसी परिस्थितियों में वातावरण रात के समय भी ठंडा नहीं हो पाता, जिससे शरीर को गर्मी से आराम नहीं मिलता। इसका प्रभाव विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर अधिक पड़ता है।
प्रदेश के बड़े शहरों में “अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट” भी इसका एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिनभर की गर्मी को रात तक छोड़ती रहती हैं, जिससे तापमान ऊँचा बना रहता है। हालांकि कुछ स्थानों पर अपेक्षाकृत राहत देखने को मिली। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 19.2°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.2°C कम है। खंडवा में भी न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रिकॉर्ड हुआ।