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Rajasthan : एनसीआर से बाहर होंगे भरतपुर व अलवर जिले! 5 साल से अटका है प्रस्ताव, जानिए क्या है मामला

Rajasthan : दिसंबर 2021 को बोर्ड ने 2041 के मास्टर प्लॉन का ड्राफ्ट मंजूर किया था। केन्द्र सरकार के इस आदेश से भरतपुर व अलवर जिला एनसीआर से बाहर हो जाएंगे। कब, जानिए क्या मामला।

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फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमा 100 किमी करने का प्रस्ताव पांच वर्ष से कागजों में अटका हुआ है। केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार होने के बाद भी यह प्रस्ताव अब तक स्वीकृत नहीं हो पाया है। इससे एनसीआर के दायरे में आ रहे क्षेत्रों में पाबंदियों का असर विकास कार्यों व उद्योग-धंधों पर पड़ रहा है। एनसीआर के तहत फिलहाल 22 जिले हैं, जिनमें हरियाणा के 13, उत्तर प्रदेश के सात और राजस्थान के दो जिले भरतपुर और अलवर है। 17 दिसंबर 2021 को बोर्ड ने 2041 के मास्टर प्लॉन का ड्राफ्ट मंजूर किया था। इसमें केन्द्र सरकार ने यह तय किया था कि दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर दूर तक ही एनसीआर का क्षेत्र होगा जो मेरठ तक होगा। इस आदेश से भरतपुर व अलवर जिला एनसीआर से बाहर हो जाएंगे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का विचार 1991 में क्रियान्वित किया गया। 2021 में नए प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी देने के बाद आपत्तियां मांगी गई थी, लेकिन राज्यों की आपत्तियां और अंतिम अधिसूचना जारी न होने के कारण यह अभी तक फाइलों में अटका हुआ है। एक जुलाई 2013 को भरतपुर व वर्ष 1991 में अलवर जिले को एनसीआर में शामिल करते समय बड़े-बड़े सपने दिखाए गए कि दिल्ली राजधानी में जनसंख्या के दवाब को कम करने के लिए कई बड़े सरकारी कार्यालय यहां लाए जाएंगे। यह भी कहा गया कि कुछ ही दशकों में हवाई अड्डा विकसित होगा लेकिन मामला बढ़ा नहीं और एनसीआर में हवाई अड्डा तो दूर की बात बड़े सरकारी कार्यालय तक नहीं आए। भरतपुर को किसी बड़ी महत्वाकांक्षी योजना से नहीं जोड़ा गया।

इस कारण किया था शामिल

एनसीआर में भरतपुर को शामिल करने का मकसद दिल्ली से सटे हुए शहरों को विकसित किया जाए। इससे दिल्ली पर जनसंख्या का दवाब कम किया जा सके। दिल्ली की आबादी देश में सबसे अधिक 35 प्रतिशत बढ़ोतरी कर रही है जो मुम्बई से 10 प्रतिशत अधिक है। इसके कारण दिल्ली में मूलभूत संसाधन कम होने लगे हैं।

अब नुकसान से तौबा, बाहर आएं तो बेहतर - एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का कहना कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास को सही ढंग से लागू नहीं किया गया। इसके कारण यह स्थिति बनी। अब यहां पेट्रोल व डीजल महंगा मिलने लगे और वाहन रखने की अवधि घटा दी गई। सरसों तेल उद्योग की नई इकाइयों को एनओसी नहीं मिल पा रही है।

चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण कुमार अग्रवाल ने बताया कि भरतपुर जिले को एनसीआर से बाहर करने में ही फायदा है। अब तक इसका लाभ नहीं हुआ। यहां दिल्ली में प्रदूषण के कारण फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। अमित गोयल ने बताया कि भरतपुर को एनसीआर से बहुत नुकसान हुआ है।

एनसीआर से यह नुकसान…

1- भरतपुर में आतिशबाजी और प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी श्रेणियों (बीएस -1, बीएस-2, बीएस-3) के वाहनों पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है।
2- दिल्ली में प्रदूषण बढऩे पर एनसीआर की गाइडलाइंस और पर्यावरण नियमों के चलते खनन और इससे जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगती है।
3- विकास कार्य बंद हो जाते हैं।
4- कठोर नियमों के कारण जिले में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास ठीक से नहीं हो पा रहा है।
5- विकास योजनाओं (जैसे मेट्रो, बेहतर रेल कनेक्टिविटी) का सीधा फायदा जो दिल्ली के आसपास के अन्य एनसीआर क्षेत्रों को मिलता है, वह भरतपुर तक नहीं पहुंच पाया है।

पूर्व में स्वीकृत हो चुका है प्रस्ताव

वर्ष 2021 में केंद्र सरकार की कमेटी व नामित सदस्यों के साथ हुई बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था, लेकिन अब सरकार को चाहिए कि दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने का लाभ लेते हुए भरतपुर को एनसीआर बोर्ड से बाहर निकाला जाए क्योंकि तब से अब तक एक भी नई फैक्ट्री यहां नहीं लग पाई है। एनसीआर से कोई लाभ तक नहीं मिला है।
डॉ. सुभाष गर्ग, विधायक भरतपुर

एनसीआर बोर्ड ने जोनल प्लान के लिए मांगी थी टिप्पणी

कुछ समय पहले एनसीआर बोर्ड ने जोनल प्लान के लिए टिप्पणी मांगी थी कि क्या कुछ और बेहतर किया जा सकता है। इसमें प्रशासन की ओर से उद्योगों के लिए नया एरिया, बेहतर लिंक वे आदि की सुविधाएं शामिल करने को लेकर टिप्पणी भेजी गई थी। बाकी अन्य किसी प्रस्ताव के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
कमर चौधरी, भरतपुर जिला कलक्टर