अलवर के नारायणपुर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत अजबपुरा में रविवार को श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत से पहले कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
नारायणपुर के अजबपुरा गांव में आयोजित हो रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह कथा के भव्य शुभारंभ से पहले प्रेमपुरा श्याम मंदिर से एक कलश यात्रा शुरू हुई। इस यात्रा का आयोजन संत भैरवानंद महाराज के पावन सानिध्य में किया गया।
कलश यात्रा की शुरुआत से पहले मंदिर परिसर में पंडित अशोक कुमार और रूपेश शर्मा ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी-धजी 101 महिलाओं ने अपने सिर पर आस्था का मंगल कलश धारण किया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और डीजे पर बजते मनमोहक भजनों के साथ जब यह यात्रा आगे बढ़ी, तो पूरा गांव भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
यह कलश यात्रा प्रेमपुरा श्याम मंदिर से रवाना होकर गांव के मुख्य बाजारों और अलग-अलग रास्तों से होती हुई कथा स्थल वनखंडी महादेव आश्रम पहुंची। ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खूबसूरत रंगोलियां सजाईं। जैसे ही कलश यात्रा वहां से गुजरी, लोगों ने छतों से फूल बरसाकर अपनी गहरी आस्था प्रकट की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र श्रीमद् भागवत ग्रंथ को सिर पर रखकर पूरे क्षेत्र की परिक्रमा भी की।
इस मौके पर भैरवानंद महाराज ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में धर्म, अच्छे संस्कार और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। कथा के आयोजन से आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हमारी नई उम्र की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं महान परंपराओं को करीब से जानने और उनसे जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में संगीतमय कथा का वाचन गोवर्धन से आए कथावाचक गोविंद शास्त्री की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने पहले दिन कथा की महिमा बताते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा को सच्चे मन से सुनने मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश हो जाता है। यह दिव्य कथा रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर बाद 4 बजे तक सुनाई जाएगी। इस भव्य श्रीमद् भागवत कथा का समापन आगामी 14 जून को होगा, जिसके बाद पूर्णाहूति का हवन यज्ञ किया जाएगा और दोपहर को भंडारे (प्रसाद) का आयोजन होगा।