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मिनी स्टेडियम की घोषणा कागजों में गुम, धरातल पर निर्माण के नाम पर कुछ नहीं हुआ

पिनान. गांवों मेें अब शहरों के जैसी सुविधाएं, रोजगार और उच्च शिक्षा हर नागरिक की आवश्यकता बन चुकी है। यदि ये सुविधाएं गांवों और कस्बों में उपलब्ध हों, तो ग्रामीणों को शहरों का रुख क्यों करना पड़ेगा? पिनान कस्बे में भी यही सवाल उठ रहे हैं। यहां के लोग मानते हैं कि अगर यहां भी […]

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पिनान. गांवों मेें अब शहरों के जैसी सुविधाएं, रोजगार और उच्च शिक्षा हर नागरिक की आवश्यकता बन चुकी है। यदि ये सुविधाएं गांवों और कस्बों में उपलब्ध हों, तो ग्रामीणों को शहरों का रुख क्यों करना पड़ेगा? पिनान कस्बे में भी यही सवाल उठ रहे हैं। यहां के लोग मानते हैं कि अगर यहां भी शहर जैसी सुविधाएं मिलें, तो ग्रामीणों को शहरों का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। पूर्व में राजकीय खेल मैदान में आयोजित एक सभा के दौरान तत्कालीन युवा मामले व खेल राज्यमंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह ने मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक धरातल पर स्टेडियम निर्माण के नाम पर कुछ नहीं हुआ।लोगों का आरोप है कि वर्तमान में पिनान और आसपास के गांवों का विकास स्थानीय जनप्रतिनिधियों व सरकार की प्राथमिकता से बाहर है। सरकारी योजनाओं और प्रशासन की उपेक्षा के कारण पिनान क्षेत्र विकास के अभाव में पिछड़ रहा है। यहां के खेल प्रेमियों सहित लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकारी तंत्र का ध्यान मुख्य रूप से नगर निकायों और शहरी क्षेत्रों के विकास पर ही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों की अनदेखी हो रही है।

कस्बे की आबादी 25 हजार से अधिकयहां के लोगों का कहना है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बनने के बाद पिनान कस्बे को एक पहचान तो मिली, लेकिन यहां उप तहसील बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। जबकि यह मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके अभाव में कस्बे के विकास कार्यों में रुकावट आई है। 25 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में मिनी स्टेडियम की घोषणा के बावजूद खेल प्रेमियों के लिए खेल मैदान की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। यह विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की लापरवाही का एक उदाहरण है।

उच्च शिक्षा का केन्द्र नहींपिनान सहित क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके और भविष्य में बेहतर अवसर पा सके। यदि पिनान में महाविद्यालय स्थापित होता तो विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए अन्य शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होती। नागरिकों का मानना है कि यदि गांवों में शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो, तो गांव का पैसा गांव में और शहर का पैसा शहर में रहेगा। इससे न केवल ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि गांवों का भी समुचित विकास होगा। इस बारे में संबंधितों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई।

सरकार ने पिनान की उपेक्षा की हैपिनान बड़ा कस्बा है। इस बजट में उप तहसील, पंचायत समिति और पुलिस थाना बनाने की मांग रखी थी। सरकार ने पिनान की उपेक्षा की है। यहां विकास करने की इच्छाशक्ति नहीं है। क्षेत्र के लिए बजट में सरकार को ध्यान रखना चाहिए था।

मांगे लाल मीणा, क्षेत्रीय विधायक।