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एनसीआर में कोयला आधारित उद्योगों पर सख्ती, स्वच्छ ईंधन अपनाने के निर्देश

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कोयला आधारित उद्योगों पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Mar 13, 2026

अलवर. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कोयला आधारित उद्योगों पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अलवर, भिवाड़ी, नीमराणा और टपूकड़ा क्षेत्र में संचालित उद्योगों को कोयले के स्थान पर वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उद्योगों और अन्य हितधारकों से इस संबंध में सुझाव भी मांगे गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय अलवर-भिवाड़ी की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि कोयला आधारित इकाइयों को चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ ईंधन की ओर शिफ्ट करना होगा, ताकि एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। इसके तहत उद्योगों को प्राकृतिक गैस (सीएनजी, एलएनजी, आरएलएनजी), बायोगैस, अक्षय ऊर्जा स्रोत और विद्युत जैसे विकल्प अपनाने के लिए कहा गया है। दरअसल, यह निर्देश उच्चतम न्यायालय में चल रहे एम.सी. मेहता बनाम केंद्र सरकार प्रकरण में दिए गए आदेशों की पालना में जारी किए गए हैं। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह आम सूचना के रूप में जारी की गई है और यदि किसी उद्योग को इस संबंध में आपत्ति है्र तो वह निर्धारित समय सीमा में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है।
उद्योगों को बदलाव के लिए मिलेगा समय
कोयला आधारित उद्योगों को वैकल्पिक ईंधन अपनाने के लिए कुछ समय दिया जाएगा, ताकि उद्योग अपने बॉयलर और मशीनरी को गैस या विद्युत आधारित प्रणाली में बदल सकें। हालांकि उद्योगपतियों का कहना है कि फिलहाल क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सीमित है। गैस पाइपलाइन और सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं होने से उद्योगों को संचालन लागत बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता है।
एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर फोकस
भिवाड़ी-नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र लंबे समय से वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा में रहा है। एनसीआर के शहरों में खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए कोयला जैसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन पर निर्भरता कम करने की नीति बनाई जा रही है। इसी के तहत उद्योगों को स्वच्छ ईंधन अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने को कहा गया है।