
फाइल फोटो
अलवर। राजस्थान में कोटपुतली-बहरोड़ जिले के बहरोड़ की कोतवाली पुलिस ने चेक बाउंस के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ता और उसके भतीजे के साथ थाने में मारपीट के मामले में बहरोड़ के पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार ने संज्ञान लेते हुए थाना अधिकारी विक्रांत शर्मा सहित दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है।
देवेंद्र कुमार ने बुधवार को बताया कि दो दिन पहले बहरोड़ के माजरी कलां गांव के ग्रामीणों ने ज्ञापन देकर बताया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता और उसके भतीजे को चेक बाउंस मामले में थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
इसके बाद उन दोनों लोगों की थाने के अंदर बेरहमी से पिटाई की गई। मामले में संज्ञान लेते हुए थाना अधिकारी सहित दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस पूरे मामले की जांच कोटपुतली के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली को दी गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
इससे पहले संघ के कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव से मिले थे। पीड़ितों ने पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और कहा था कि उन्हें थाने में बुलाकर बेरहमी से पीटा गया। इस पर यादव ने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यादव ने कोतवाली प्रभारी विक्रांत शर्मा की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह किसी भी नागरिक, खासकर भारतीय जनता पार्टी और संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ थाने में मारपीट करना पूरी तरह गलत और निंदनीय है।
उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर कोतवाली प्रभारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। विधायक ने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का पुलिस से भरोसा उठ जाएगा। उधर, थाने में संघ कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट की खबर फैलते ही क्षेत्र में रोष व्याप्त हो गया।
बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग नीमराणा स्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर बहरोड़ थाना अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
वहीं पीड़ित यशवंत यादव और उम्मेद सिंह का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। पीड़ितों ने एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच के बाद मामला दर्ज नहीं किया, तो वे आंदोलन करेंगे।
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Published on:
21 Jan 2026 07:24 pm
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