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अलवर, May 24, 2026

एनजीटी ने रीको औद्योगिक क्षेत्र सोतानाला से भूजल प्रदूषण मामले में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

आद्योगिक क्षेत्रों के पास पानी में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने रीको औद्योगिक क्षेत्र सोतानाला व आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण मामले को पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने मंडल को निर्देशित किया है कि वह प्रदूषण फैलाने वाले वास्तविक उद्योगों की पहचान करे। साथ ही, प्रदूषण रोकने एवं सुधारात्मक कदमों की जानकारी प्रस्तुत तथा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने अलवर जिले के रीको औद्योगिक क्षेत्र सोतानाला व आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। धांसा लैब्स लिमिटेड (पूर्व में अम्बे लैबोरेट्रीज़ लि.) बनाम राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल व अन्य के केस में न्यायाधीश शियो कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने यह आदेश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त, 2026 को होगी।
मामले में बताया गया कि रीको औद्योगिक क्षेत्र सोतानाला, तहसील बहरोड़ तथा आसपास के क्षेत्रों में भूजल में कीटनाशक अवशेषों के कारण गंभीर प्रदूषण फैल रहा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआइएच), रुड़की से कराए गए अध्ययन में पाया कि केशवाना व सोतानाला रीको क्षेत्रों का भूजल अत्यधिक प्रदूषित है तथा यह प्रदूषण भविष्य में बहरोड़ क्षेत्र तक फैल सकता है। अध्ययन रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भूजल की गुणवत्ता मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। रिपोर्ट में भूजल शोधन तकनीकों के उपयोग तथा वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाने की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि रीको औद्योगिक क्षेत्र सोतानाला व आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इससे जमीनी पानी खराब होता जा रहा है।


यह दिए निर्देश
एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को निर्देशित किया है कि वह प्रदूषण फैलाने वाले वास्तविक उद्योगों की पहचान करे। साथ ही, प्रदूषण रोकने एवं सुधारात्मक कदमों की जानकारी प्रस्तुत तथा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
एमआइए में भी हालात खराब
एमआइए की फैक्ट्रियों का पानी भी अग्यारा बांध में आता है। इस वजह से यहां आसपास के गांवों के हाल खराब है। इस पानी से न केवल बदबू फैल रही है बल्कि भूमिगत जल भी दूषित हो रहा है। यहां की खेती पर भी विपरित प्रभाव पड़ रहा है। जमीन में रसायन की मात्रा ज्यादा होने से खेती जहर होती जा रही है। यही नहीं जिलेभर में जहां भी औद्योगिक क्षेत्र है, वहां भी आसपास जमीन का पानी खराब होता जा रहा है।

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