
representative picture (patrika)
राजस्थान के अलवर में वर्ष 2023 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। जिला परिषद अलवर की ओर से कराई गई भर्ती में चयनित 20 अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसका खुलासा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली द्वारा लगाए गए प्रश्न के जवाब में हुआ।
सबसे खास बात यह है कि जिला परिषद ने इस आधार पर इन 20 लोगों को नियुक्ति तो नहीं दी, लेकिन इनके प्रमाण पत्र फर्जी होने पर न तो कोई मुकदमा दर्ज कराया और न ही सरकार को इन सभी लोगों की सूची भिजवाई। यदि जिला परिषद ऐसा करती तो ये अन्य भर्तियों के लिए अपात्र घोषित हो सकते थे।
जिला परिषद ने विधानसभा को भेजी सूचना में बताया है कि दिव्यांग कोटे में करीब 82 लोगों को अलवर जिला आवंटित हुआ था, जिसमें 42 लोगों के ही प्रमाण पत्र सही पाए गए। बाकी 20 के फर्जी मिले। छह लोग पकड़े जाने के डर से मेडिकल टीम के सामने उपस्थित ही नहीं हुए। बाकी 14 लोगों को उनकी ओर से प्रार्थना पत्र देने पर सहानुभूति के आधार पर सवाई मानसिंह चिकित्सालय में दोबारा से परीक्षण कराया गया। इसके बाद इनमें से भी कुछ लोगों की नौकरी लग गई।
वर्ष 2023 में हुई ग्राम विकास अधिकारी भर्ती में भी दिव्यांग श्रेणी के वीडीओ की नियुक्ति में गड़बड़ सामने आई है। जिला परिषद ने जिला कलक्टर को भेजी रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस भर्ती में 9 दिव्यांग श्रेणी के ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती हुई। इनमें से एक ग्राम विकास अधिकारी श्रवण लाल यादव का दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। वहीं, मेडिकल टीम के सामने अनुपस्थित रहे दूसरे ग्राम विकास अधिकारी ने यह कहकर इस्तीफा दे दिया कि उसकी नियुक्ति शिक्षक पद पर हो गई है।
जिला परिषद ने श्रवण लाल यादव को सेवा से बर्खास्त कर दिया, लेकिन आज तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया। परिषद ने जिला कलक्टर अलवर को भेजी इस रिपोर्ट में माना है कि नियुक्ति आदेश जारी किए जाने से पहले ही दिव्यांगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाना था, लेकिन बाद में कराया गया। हाल ही में इस मामले में भी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में प्रश्न लगाया है।
Updated on:
17 Feb 2026 11:31 am
Published on:
17 Feb 2026 11:30 am
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