
Photo: AI generated
अलवर। सरिस्का टाइगर रिजर्व के लिए विश्वविख्यात अलवर में अब बब्बर शेर की गूंज भी सुनाई देगी। यही नहीं दक्षिण अफ्रीका के जिराफ भी यहां नजर आएंगे। केंद्र सरकार ने कटी घाटी पर एनसीआर के सबसे बड़े बायोलॉजिकल पार्क बनाने की मंजूरी दे दी है। इसके जल्द टेंडर होंगे। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कटी घाटी स्थित नगर वन में इसकी घोषणा की।
वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के दो वर्ष पूरे होने पर पौधरोपण करने यहां पहुंचे थे। यहां एक जिला-एक वृक्ष में अलवर जिले में चयनित अर्जुन के एक साथ 730 औषधीय पौधे लगाए गए। इस दौरान अर्जुन वृक्ष उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान राजमाता की तरह यहां भी टाइगर का एक मॉन्यूमेंट रखवाया गया है। इसे संगमरमर से तैयार किया गया है।
शर्मा ने कहा कि शेर और जिराफ के अलावा भी 420 प्रकार के पशु-पक्षी यहां लाए जाएंगे। इससे अलवर को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन बढ़ेगा। शर्मा ने कहा कि पांच साल में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। पहले वर्ष में 7 करोड़ और दूसरे वर्ष में 11 करोड़ से अधिक पौधे जनसहयोग से लगाए जा चुके हैं।
इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता, पूर्व सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान, जिलाध्यक्ष संजय नरूका, सीसीएफ जयपुर रामकरण खैरवा, वन संरक्षक राजेंद्र हुड्डा, सरिस्का के क्षेत्र निदेशक संग्राम सिंह, आईटीबीपी के कमाण्डेंट श्री सुल्तान सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री सोहन सिंह नरूका, जिला अध्यक सहित अनेक कार्यकर्ता व आमजन मौजूद रहे।
शर्मा ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पर भी निशाना साधा और कहा कि ये लोग अरावली बचाने की बात करते हैं, लेकिन आज तक एक पौधा नहीं लगाया। बल्कि नगर वन में प्रदर्शन के दौरान कई पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया। शर्मा नगर वन की पहाड़ी पर भी गए, जहां कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था।
कोर्ट के आदेशानुसार ही मिलेंगे प्रेम रत्नाकर बांध में पट्टे
कटी घाटी के पास प्रेम रत्नाकर बांध में हो रहे अवैध निर्माण के मामले में शर्मा ने कहा कि इसे लेकर कोर्ट के आदेश आए हुए हैं। उन आदेशों का अध्ययन कर पट्टे मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि कई एनिकट बनाए जा रहे हैं, ताकि अलवर शहर के जल संकट को दूर किया जा सके। टहला में जमीनों की बंदरबांट को लेकर वन राज्यमंत्री ने कहा कि इसमें धांधली पकड़ी गई और कलक्टर को हटा दिया गया था। अब यदि आवंटन खारिज करने के बाद जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं तो उसकी जांच कराएंगे।
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Published on:
18 Jan 2026 10:11 am
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