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अजमेर में ADA का बड़ा एक्शन: मार्टिंडल ब्रिज से श्रीनगर रोड तक चला बुलडोजर, पुलिस की मौजूदगी में 48 गुमटियां ध्वस्त

ADA Bulldozer Action: मार्टिंडल ब्रिज से श्रीनगर रोड पर सड़क किनारे स्थित 48 गुमटियों को अजमेर विकास प्राधिकरण के दस्ते ने बुधवार को ध्वस्त कर दिया।

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Ajmer bulldozer action

सड़क किनारे बनी गुमटियों पर चला बुलडोजर। फोटो: पत्रिका

अजमेर। मार्टिंडल ब्रिज से श्रीनगर रोड पर सड़क किनारे स्थित 48 गुमटियों को अजमेर विकास प्राधिकरण के दस्ते ने बुधवार को ध्वस्त कर दिया। अधिकांश गुमटियां खाली की जा चुकी थी। इस दौरान पुलिस जाप्ता मौजूद रहा। गुमटियां हटने के बाद सड़क चौड़ी नजर आई।

मार्टिंडल ब्रिज से श्रीनगर रोड तक संचालित करीब 50 से ज्यादा गुमटियां बनी हुई थी। इन्हें बीते दिसम्बर में हटाया जाना था। जिला प्रशासन और अजमेर विकास प्राधिकरण ने गुमटियों के दुकानदारों को सामान खाली करने का समय दिया था। दिसम्बर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के उर्स, राज्यपाल, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के दौरे के कारण जाप्ता नहीं मिलने से प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पाई थी।

सुबह पहुंच गई टीम

एडीए के उपायुक्त उत्तर अनिल चौधरी और उपायुक्त दक्षिण जयपाल सिंह राठौड़ के निर्देशन में टीम सुबह 10 बजे पुलिस जाप्ते के साथ मार्टिंडल ब्रिज पहुंच गई। इन गुमटियों में पंचर, प्रेस, सब्जी, मीट सहित अन्य दुकानें संचालित हो थीं। प्रशासन ने रोड रोककर गुमटियों को हटाने की कार्रवाई अंजाम दी। करीब दो घंटे में 48 गुमटियों को ध्वस्त कर दिया।

सालों से हो रहा था अवैध संचालन

वर्ष 2000 से 2002 की अवधि में नगर सुधार न्यास ने दस साल की लीज पर गुमटियों का आवंटन किया था। लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद गुमटियों का अवैध रूप से संचालन हो रहा था। अब शहर में सुगम यातायात के लिए इन पर कार्रवाई की गई।

मूल आवंटियों की नहीं जानकारी

क्रिश्चियनगंज थाने के पीछे पंचशील नगर, नसीराबाद रोड, रामगंज थाने के पास, जीसीए के नजदीक सहित शहर के कई क्षेत्रों में गुमटियां बनी हुई हैं। इन गुमटियों में अधिकांश मूल आवंटियों की जगह अन्य लोगों के कब्जे हैं। मूल आवंटी इन्हें अन्य लोगों को सबलेट कर चुके हैं।

नगरीय विकास मंत्री ने दिए थे आदेश

बीते साल नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अजमेर विकास प्राधिकरण आयुक्त व निगम आयुक्त को प्रमुख मार्गों का सर्वे करा अतिक्रमण चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। राजस्थान पत्रिका ने भी शहर में हो रहे अतिक्रमणों का मुद्दा उठाया था।