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जज्बात से खिलवाड़: अजमेर में बच्चा गोद दिलवाने के नाम पर ठगी का नया जाल

अजमेर अब नि:संतान दम्पतियों के लिए ठगी का नया केन्द्र बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर बच्चा गोद दिलाने के नाम पर सक्रिय ठग गिरोह नि:संतान दम्पतियों के जज्बात से खेल उनसे हजारों-लाखों रुपए ऐंठ रहा है।

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जज्बात से खिलवाड़: अजमेर में बच्चा गोद दिलवाने के नाम पर ठगी का नया जाल

बच्चा गोद लेने की चाहत में उत्तर प्रदेश से अजमेर आए पिता-पुत्र। पत्रिका

अजमेर. अजमेर अब नि:संतान दम्पतियों के लिए ठगी का नया केन्द्र बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर बच्चा गोद दिलाने के नाम पर सक्रिय ठग गिरोह नि:संतान दम्पतियों के जज्बात से खेल उनसे हजारों-लाखों रुपए ऐंठ रहा है। शुक्रवार को यूपी के बनारस और दिल्ली से अजमेर पहुंचे दो दम्पती ठग गिरोह का शिकार बने। दोनों मामलों में करीब 30 हजार रुपए की ठगी सामने आई। इससे पुलिस और सीडब्ल्यूसी को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ।

अजमेर में इन दिनों फिर से ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो कि सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बच्चा गोद दिलाने के नाम से फर्जी रील, वीडियो और पेम्पलेट वायरल कर रहा है। बच्चा नहीं होने की पीड़ा झेल रहे दम्पती जब इनसे संपर्क करते हैं तो ठग उन्हें कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेज व जल्द अडॉप्शन का भरोसा दिलवा कर रकम वसूलते हैं। जैसे ही दम्पति बच्चे की उम्मीद लेकर अजमेर पहुंचते हैं, आरोपी अपने मोबाइल नंबर बंद कर देते हैं या लोकेशन बदलकर फरार हो जाते हैं।

केस-1 : बनारस से अजमेर तक ठगी का सफर

उत्तर प्रदेश के अलीनगर चंदोली (बनारस) निवासी पंडित तरुण पांडे की शादी चार साल पहले हुई थी। चिकित्सकीय जांच में पत्नी के मां न बन पाने की पुष्टि होने पर दम्पती ने बच्चा गोद लेने का फैसला किया। 5 दिसंबर को सोशल मीडिया पर एक रील देखकर तरुण ने संपर्क किया। ठगों ने फीस, वकील, गवाह और मेडिकल सर्टिफिकेट के नाम पर करीब 30 हजार रुपए वसूल लिए। 2 जनवरी को पुष्कर स्थित एक धर्मशाला में बुलाया गया। जब तरुण अपने पिता व पत्रिका संवाददाता के साथ वहां पहुंचे तो खतरा भांपकर आरोपी सोशल मीडिया अकाउंट डिलिट कर फरार हो गया।

केस-2 : दिल्ली का दम्पती भी ठगा गया

प्राइवेट फाइनेंस कंपनी में कार्यरत उमेश और उनकी पत्नी उषा भी इसी गिरोह का शिकार बने। सोशल मीडिया पर रील देखकर संपर्क करने पर उन्हें 2 जनवरी को अजमेर बुलाया गया। उषा अपने भाई के साथ दिनभर बच्चे की आस में भटकती रहीं, लेकिन शाम तक आरोपी ने मोबाइल बंद कर दिया। निराश दम्पती ने सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर कार्रवाई शुरू की गई है।

ठगी का तरीका

गिरोह पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 1050 रुपए लेता है। इसके बाद वकील की फीस 10 हजार, 3 गवाहों के इंतजाम के नाम पर 9 हजार, मेडिकल सर्टिफिकेट और दस्तावेज के लिए 12 हजार रुपए तक वसूला जाता है। रकम छोटी-छोटी रखी जाती है ताकि पुलिस भी मामले को गंभीरता से न ले। इस तरह मोटी रकम ठगने के बाद जालसाज का पता नहीं चलता और नि:संतान दम्पति की उम्मीदें टूट जाती हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

पूर्व में अहमदाबाद का एक दम्पती इसी गिरोह का शिकार हुआ था। सीडब्ल्यूसी के हस्तक्षेप पर ब्यावर रोड स्थित एक कथित दफ्तर पर कार्रवाई हुई, लेकिन पुलिस की ढिलाई से आरोपी बच निकले। प्रकरण सामने आने पर सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अंजली शर्मा, सदस्य एडवोकेट अरविन्द मीणा, तबस्सुम बानो व राजलक्ष्मी करारिया ने जिला कलक्टर, एसपी को पत्र लिखकर गिरोह पर कार्रवाई के लिए लिखा है।

पुलिस की उदासीनता से बढ़ रहे हौसले

पीड़ितों का कहना है कि सारा लेनदेन यूपीआई से हुआ है, मोबाइल कॉल, सोशल मीडिया चैट के पुख्ता सबूत मौजूद हैं, इसके बावजूद रकम कम होने के कारण पुलिस विशेष रुचि नहीं दिखा रही।

क्या हैं चाइल्ड अडॉप्शन के नियम

केंद्र सरकार की सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी(CARA) के अनुसार शादीशुदा दम्पती को कम से कम दो वर्ष विवाहित होना जरूरी है। माता-पिता किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित न हों और बच्चे, माता-पिता की उम्र में न्यूनतम 25 वर्ष का अंतर हो। अडॉप्शन के लिए पहचान, आय, मेडिकल व वैवाहिक दस्तावेज अनिवार्य हैं।

इनका कहना है

सोशल मीडिया पर अजमेर के नाम पर नि:संतान दम्पतियों से ठगी की जा रही है, जिससे शहर की छवि धूमिल हो रही है। गिरोह के खिलाफ जिला कलक्टर और एसपी को पत्र लिखा गया है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई हुई तो भविष्य में कई परिवार ठगी से बच सकेंगे।

अंजली शर्मा, अध्यक्ष सीडब्ल्यूसी

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