
अजमेर। जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर हो रहे अमरीकी-इज़राइली हमलों (US-Israel Strikes) और खाड़ी देशों में उड़ते मिसाइलों पर टिकी हैं, ठीक इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर की धरा से एक ऐसी ऐतिहासिक कड़ी को जोड़ा, जिसने इज़राइल और राजस्थान के अटूट रिश्तों को फिर से ताजा कर दिया है।
दरअसल, शनिवार को अजमेर की 'कायड़ विश्राम स्थली' पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वे अभी हाल ही में इज़राइल की यात्रा पूरी कर लौटे हैं और वहां आज भी राजस्थान के सपूतों की वीरता के किस्से घर-घर में सुनाए जाते हैं।
पीएम मोदी ने बताया कि अपनी इज़राइल यात्रा के दौरान उन्हें वहां की संसद (नेसेट) में मेजर दलपत सिंह के शौर्य को नमन करने का सौभाग्य मिला।
"राजस्थान के वीरों ने इज़राइल के हाइफा शहर को आजाद कराने में जो भूमिका निभाई, उसे इज़राइल के लोग आज भी गौरव से याद करते हैं। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारे दिलों का रिश्ता है।" - नरेंद्र मोदी (अजमेर रैली)
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।
ईरान पर हमला: इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के मारे जाने की खबरें भी आ रही हैं।
रणनीतिक संदेश: इस तनाव के बीच राजस्थान आकर इज़राइल के साथ सैन्य गौरव का जिक्र करना यह दर्शाता है कि भारत और इज़राइल के रिश्ते केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बलिदानों पर आधारित हैं। यह संदेश सीधे तौर पर दुनिया को भारत की मजबूत कूटनीति का अहसास कराता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मेजर दलपत सिंह शेखावत का जिक्र किया।
कौन थे मेजर दलपत सिंह? जोधपुर के पाली (देवली) के मूल निवासी मेजर दलपत सिंह शेखावत प्रथम विश्व युद्ध (1918) के दौरान जोधपुर लांसर्स के कमांडर थे।
हाइफा की जंग (Battle of Haifa): 23 सितंबर 1918 को मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व में राजस्थान के वीर बांकुरों (जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स) ने केवल तलवारों और भालों के दम पर ऑटोमन साम्राज्य की तोपों और मशीनगनों को धूल चटा दी थी।
ऐतिहासिक विजय: इसी युद्ध के कारण इज़राइल का प्रमुख शहर 'हाइफा' आजाद हुआ था। मेजर दलपत सिंह इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, जिसके बाद उन्हें 'हाइफा का नायक' (Hero of Haifa) कहा गया। इज़राइल के स्कूलों में आज भी उनकी बहादुरी का पाठ पढ़ाया जाता है।
जन्म: 26 जनवरी 1892, जोधपुर रियासत
पद: मेजर, जोधपुर लांसर्स (15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवेलरी ब्रिगेड)
सम्मान: मरणोपरांत ब्रिटिश सरकार द्वारा 'मिलिट्री क्रॉस' (MC) से सम्मानित
दिल्ली का 'तीन मूर्ति चौक': दिल्ली का प्रसिद्ध 'तीन मूर्ति चौक' असल में जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद के उन वीरों की याद में बना है जिन्होंने हाइफा की जंग जीती थी। मोदी सरकार ने हाल ही में इसका नाम बदलकर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' किया है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि राजस्थान के सपूतों ने केवल देश की सीमाओं की रक्षा नहीं की, बल्कि सात समंदर पार भी मानवता और आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं।
Updated on:
01 Mar 2026 11:46 am
Published on:
01 Mar 2026 11:45 am
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