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स्त्री: देह से आगे: पुरुष का आधा भाव स्त्री और स्त्री का आधा भाव पुरुष है, दोनों में कोई छोटा या बड़ा नहीं : गुलाब कोठारी

जेएलएन मेडिकल कॉलेज में आयोजित स्त्री देह व्याख्यान में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि स्त्री केवल देह नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति है। उन्होंने अर्धनारीश्वर की अवधारणा बताते हुए कहा कि स्त्री-पुरुष समान हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक अनीता भदेल व प्राचार्य डॉ. अनिल सांवरिया ने किया।

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अजमेर

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Arvind Rao

Jan 21, 2026

Stree Deh Se Aage

राजस्थान पत्रिका समूह प्रधान संपादक, गुलाब कोठारी

Street Body Se Age Program Ajmer: राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि स्त्री केवल देह मात्र नहीं है। पुरुष में 51 प्रतिशत पुरुष और 49 प्रतिशत स्त्री के गुण होते हैं। इसी तरह स्त्री में भी 51 प्रतिशत स्त्री और 49 प्रतिशत पुरुष तत्व होते हैं। यह बात उन्होंने बुधवार को जेएलएन मेडिकल कॉलेज में आयोजित स्त्री देह व्याख्यान कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक शिक्षा ने हमें परिवार, समाज और राष्ट्र से कहीं न कहीं पृथक कर दिया है। स्त्री मां, पत्नी और बहन के रूप में परिवार और समाज को पल्लवित और पोषित करती है। वही लक्ष्मी है और वही माया भी। पुरुषों में स्त्री भाव कम होने के कारण वह जिम्मेदारियों के प्रति उतना सजग नहीं होता।

दूसरी ओर, एक बच्ची पांच वर्ष की आयु से ही अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगती है। परिवार में लड़का होने पर उसे हर कार्य की छूट मिलती है, जबकि कन्या, जो परिवार की सदस्य है, वह दायित्व और जिम्मेदारी के लिए स्वयं को तैयार करने लगती है।

उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य आगे बढ़ना है। मां के पास असीम दिव्य शक्ति होती है। वह परिवार में आने वाले नए सदस्य को अपनी सांसों और दिव्य गुणों से पहचान लेती है। जमाना तेजी से बदल रहा है, तकनीक आगे बढ़ रही है, लेकिन हमारी मान्यताएं और परंपराएं भी बदल रही हैं।

आज हमें ‘हिंदुस्तान’ शब्द के भविष्य को समझने की आवश्यकता है। जीवन की कला को संचालित करने में स्त्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुरुष की आत्मा यदि ईश्वर है, तो स्त्री में भी वही भाव निहित है। दोनों में कोई भेद नहीं है, दोनों की भूमिकाएं समान हैं।

जो पुरुष अग्नि स्वरूप है, वही स्त्री सौम्यता का रूप है। पुरुष का आधा भाव स्त्री और स्त्री का आधा भाव पुरुष है, इसी को अर्धनारीश्वर कहा गया है। दोनों में कोई छोटा या बड़ा नहीं है।

गुलाब कोठारी ने कहा कि ब्रह्मांड के सभी सिद्धांत स्त्री और पुरुष दोनों के शरीर में विद्यमान हैं। आज हमें आधुनिक विज्ञान तो पढ़ाया जा रहा है, लेकिन प्रकृति के मौलिक तत्वों और सामाजिक संस्कारों से दूरी बढ़ रही है।

घर में लड़कों को अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, जबकि कन्याओं की सीमाएं तय कर दी जाती हैं। परिवार सोचता है कि लड़का कमाकर घर संभालेगा, जबकि कन्या भविष्य के लिए खुद को तैयार करती है और अपने सपनों को आकार देती है।

वह एक नए निर्माण के लिए स्वयं को तैयार करती है। स्त्री माया और कामना का शक्तिपुंज है। इस अवसर पर विधायक अनीता भदेल और जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सांवरिया ने कार्यक्रम का माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। शहर व आसपास से आई महिलाओं और छात्राओं ने भी प्रश्न पूछे।

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