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आणंद जिले के युवक-युवती अज़रबैजान में लापता, सांसद के हस्तक्षेप से सुरक्षित बचाया

परिजनों ने किया था संपर्क, विदेश मंत्री एस जयशंकर से की मुलाकात, दोनों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की आणंद. जिले के एक युवक और एक युवती के विदेश जाने के लालच में मानव तस्करी और फिरौती के जाल में फंसने की घटना सामने आई। झांखरिया गांव के ध्रुव पटेल और कंथारिया गांव की […]

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सांसद मितेश पटेल।

परिजनों ने किया था संपर्क, विदेश मंत्री एस जयशंकर से की मुलाकात, दोनों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की

आणंद. जिले के एक युवक और एक युवती के विदेश जाने के लालच में मानव तस्करी और फिरौती के जाल में फंसने की घटना सामने आई। झांखरिया गांव के ध्रुव पटेल और कंथारिया गांव की दीपिका पटेल अज़रबैजान पहुंचने के बाद रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। परिजनों के संपर्क के बाद सांसद मितेश पटेल ने हस्तक्षेप किया। फिलहाल दोनों को सुरक्षित बचा लिया गया।
जानकारी के अनुसार, ध्रुव और दीपिका 30 जनवरी को अलग-अलग फ्लाइट से वडोदरा से दिल्ली पहुंचे। वहां से एक एजेंट के जरिए 1 फरवरी को विमान से तड़के दोनों अज़रबैजान के लिए रवाना हुए और बाकू एयरपोर्ट पहुंचे। एजेंट ने बाकू में उनके ठहरने की व्यवस्था की और दोनों के मोबाइल बंद करवा दिए।
अज़रबैजान पहुंचने के करीब 24 घंटे बाद दोनों ने वीडियो कॉल से परिजनों को बताया कि वे कनाडा पहुंच गए हैं। इसके बाद उस व्यक्ति ने मूल एजेंट को दरकिनार कर सीधे अपने पास भुगतान करने की मांग की। परिजनों का कहना है कि दोनों ने उनसे बात की, तब ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दोनों पर दबाव है और यातना दी जा रही है।
इसके बाद फिरौती की मांग लगातार बढ़ती चली गई। 8 फरवरी को लाखों रुपए की फिरौती की राशि चुकाने के बाद परिजनों को बताया गया कि दोनों को छोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन कुछ समय बाद एक विदेशी नंबर से दोनों युवाओं की तस्वीरों के साथ संदेश भेजा गया। इसमें कहा गया कि हम देर से पहुंचे और दोनों लोगों को खानबाबा नाम के व्यक्ति को बेच दिया गया।

65 लाख की फिरौती चुकाई

इस घटना को लेकर आणंद ग्रामीण पुलिस थाने में ध्रुव के पिता मुकेश पटेल ने पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। एजेंट और बिचौलियों की ओर से कुल लगभग 65 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई थी, जिसे परिजनों ने अलग-अलग चरणों में चुकाया। मुंबई स्थित मूल एजेंट ममता को ध्रुव के परिवार ने 35 लाख रुपए दिए। इसके बाद पवन ने मूल एजेंट को हटाकर सीधे अपने पास भुगतान की मांग की, उसे 15 लाख रुपए दिए गए। इस प्रकार अब तक कुल 65 लाख रुपए चुकाए जा चुके हैं।

दोनों भारतीय दूतावास में

सांसद मितेश पटेल ने कहा कि दोनों के परिजनों ने दो दिन पहले फोन पर घटना की जानकारी दी। मैंने तुरंत पूरी डिटेल्स, पासपोर्ट नंबर और टिकट की जानकारी के साथ विदेश मंत्रालय को ई-मेल भेजा। सोमवार को संसद के सत्र के दौरान मैं खुद विदेश मंत्रालय के कार्यालय में गया, वहां के अधिकारियों और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय और अज़रबैजान स्थित भारतीय दूतावास ने गंभीरता से काम किया कि महज 24 घंटों के भीतर ध्रुव और दीपिका को सुरक्षित बचा लिया गया। वे अभी अज़रबैजान में भारतीय दूतावास में सुरक्षित हैं।