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56 हजार विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर मनपा संचालित स्कूलों में प्रवेश लियाः सीएम

Ahmedabad: महानगरपालिका संचालित नगर प्राथमिक शिक्षा समिति के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी शिक्षा महोत्सव में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को नवनिर्मित स्कूल बोर्ड भवन और 15 स्मार्ट अनुपम स्कूलों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति संचालित शालाओं में मूल्यनिष्ठ शिक्षा के […]

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school bord Ahmedabad

स्कूल बोर्ड भवन का उद्घाटन करते।

Ahmedabad: महानगरपालिका संचालित नगर प्राथमिक शिक्षा समिति के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी शिक्षा महोत्सव में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को नवनिर्मित स्कूल बोर्ड भवन और 15 स्मार्ट अनुपम स्कूलों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति संचालित शालाओं में मूल्यनिष्ठ शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण के मंत्र को सार्थक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक 56 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर स्कूल बोर्ड की स्मार्ट स्कूलों में प्रवेश लिया है।

मुख्यमंत्री ने नवरंगपुरा में 10.61 करोड़ रुपए की लागत से बने नए स्कूल बोर्ड भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित समारोह से उन्होंने 16.11 करोड़ की लागत से बनी 15 स्मार्ट अनुपम स्कूलों का ई-लोकार्पण किया । उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की ओर से स्थापित समिति आज 453 शालाओं के साथ वटवृक्ष बन चुकी है।

इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा ने कहा कि शताब्दी शिक्षा महोत्सव गुजरात की संस्कारिता और बौद्धिक विकास का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने नई शिक्षा नीति और ‘मिशन स्कूल ऑफ एक्सलेंस’ के तहत हो रहे बदलावों को क्रांतिकारी बताया। महापौर प्रतिभा जैन ने कहा कि आज सरकारी शालाएं इतनी स्मार्ट हो चुकी हैं कि प्रवेश के लिए वेटिंग लिस्ट बन रही है।

इस अवसर पर शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जाडेजा, शहरी विकास राज्य मंत्री दर्शना वाघेला, उप महापौर जतिन पटेल, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन देवांग दाणी, स्कूल बोर्ड चेयरमैन डॉ. सुजय मेहता, मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणि समेत अनेक लोग मौजूद रह।

स्मार्ट स्कूल

इन स्मार्ट अनुपम शालाओं से विद्यार्थियों को अत्याधुनिक डिजिटल क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगों का व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं मिलेंगी। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, ड्रॉपआउट दर घटेगी और गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी स्कूल जैसी सुविधाएं सरकारी शालाओं में उपलब्ध होंगी।